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40 विधायकों के शव यहां आएंगे...सीधे पोस्टमॉर्टम के लिए मुर्दाघर भेजा जाएगा...पढ़िए संजय राउत का पूरा बयान

Post mortem swipe from Sanjay Raut यह शिवसेना है, और इसके केवल 1 पिता हैं। आप एक पिता को नहीं चुरा सकते। वे महाराष्ट्र को 3 भागों में विभाजित करना चाहते हैं। हम ऐसा नहीं होने देंगे।

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Mumbai, First Published Jun 26, 2022, 5:20 PM IST

Maharashtra Political crisis महाराष्ट्र में शिवसेना में विद्रोह के बाद आई राज्य सरकार पर संकट के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ चुके हैं। जुबानी जंग और तीखी हो चुकी है तो बागियों के खिलाफ शिवसैनिक सड़कों पर उतर चुके हैं। पिछले कई दिनों से बागियों पर मुखर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने रविवार को बागी विधायकों को खुलेआम मारने तक की धमकी दे डाली। बागी विधायकों पर हमलावर राउत ने कहा कि बालासाहेब को धोखा देने वाला खत्म हो गया... अब से हमें तय करना है कि किस पर भरोसा करें और किसकी पालकी ले जाएं। इन 40 विधायकों के शव यहां आएंगे। उन्हें सीधे पोस्टमॉर्टम के लिए मुर्दाघर भेजा जाएगा। उन्होंने रविवार को मुंबई में यह घोषणा करते हुए कहा कि वह इसे संकट नहीं मानते।

विधायक होटल में नहीं बल्कि बिग बॉस के घर पर

संजय राउत ने कहा कि जब मैं तस्वीरें देखता हूं, रैडिसन ब्लू एक होटल की तरह नहीं दिखता है, यह बिग बॉस के घर जैसा लगता है। लोग पी रहे हैं, खा रहे हैं, खेल रहे हैं। और उनमें से आधे को हटा दिया जाएगा ... आप गुवाहाटी में कब तक छुपेंगे आपको चौपाटी वापस आना होगा।

उन्होंने कहा कि जो 40 लोग हैं, वे जीवित लाशें हैं। केवल उनके शरीर यहां वापस आएंगे, वहां आत्मा मर जाएगी। जब ये 40 लोग यहां से बाहर निकलेंगे, तो वे दिल से जीवित नहीं रहेंगे। वे जानते हैं कि आग में क्या हो सकता है। यह शिवसेना है, और इसके केवल 1 पिता हैं। आप एक पिता को नहीं चुरा सकते। वे महाराष्ट्र को 3 भागों में विभाजित करना चाहते हैं। हम ऐसा नहीं होने देंगे।

विधायकों की सुरक्षा को लेकर बागी गुट चिंतित

श्री राउत की पहले की मुखर होकर बागी विधायकों पर कमेंट किए थे। उन्होंने कहा था कि विधायक, जब एक फ्लोर टेस्ट के लिए महाराष्ट्र वापस आएंगे, तो उन्हें वापस आना और घूमना मुश्किल होगा। राउत के इस बयान के बाद बागी खेमे में हलचल मच गया था।

श्री शिंदे ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल को संबोधित एक पत्र ट्वीट किया था। 16 विधायकों के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है कि विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का काम है। बागी विधायक दल के नेता एकनाथ शिंदे ने कहा कि एक एजेंडा चलाया जा रहा है जिसमें एमवीए सरकार के विभिन्न नेता अपने-अपने दलों के कैडरों को हमें और डराने के लिए हिंसा करने के लिए उकसा रहे हैं। शिंदे ने पत्र में लिखा कि संजय राउत ने याचिकाकर्ताओं और अन्य सदस्यों को यह कहते हुए धमकी दी कि वह उन विधायकों के लिए मुश्किल बना देंगे जो महाराष्ट्र में वापस जाने और महाराष्ट्र राज्य में घूमने के लिए चले गए हैं।

चौपाटी आना ही होगा

रविवार की सुबह, श्री राउत ने एक ट्वीट के साथ जवाब दिया। शिवसेना की अयोग्यता की अपील पर 16 बागी विधायकों को नोटिस देने वाले महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष नरहरि जिरवाल की तस्वीर के साथ उनकी पोस्ट में लिखा है, "गुवाहाटी में आप कब तक छिपे रहेंगे? आपको चौपाटी वापस आना होगा।" बाल ठाकरे खेमे ने दावा किया है कि श्री शिंदे के साथ डेरा डाले हुए कम से कम 20 विधायक कथित तौर पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के संपर्क में हैं। सूत्रों ने बताया है कि कुछ बागी बीजेपी में विलय के खिलाफ हैं।

शिंदे ने कर दी है शिवसेना से बगावत

दरअसल, बीते दिनों शिवसेना के सीनियर लीडर एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी। वह कई दर्जन विधायकों के साथ पहले सूरत पहुंचे। सियासी पारा चढ़ने के बाद शिंदे अपने विधायकों के साथ असम पहुंचे। यहां वह एक फाइव स्टार होटल में 40 से अधिक विधायकों के साथ डेरा डाले हुए हैं। शिंदे के पास शिवसेना के 40 बागियों व दस अन्य का समर्थन होने का दावा किया जा रहा है। शिंदे ने 24 जून की रात में वडोदरा में अमित शाह व देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने की संभावनाओं पर वह और बीजेपी के नेताओं ने बातचीत की है। हालांकि, चुपके से देर रात में हुई मुलाकात के बाद शिंदे, स्पेशल प्लेन से वापस गुवाहाटी पहुंच गए। 

उधर, शिंदे को पहले तो शिवसेना के नेताओं ने मनाने की कोशिश की लेकिन अब फ्लोर टेस्ट और कानूनी दांवपेंच चला जाने लगा है। दरअसल, शिंदे की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने सारे बागियों को वापस आने और मिलकर फैसला करने का प्रस्ताव दिया। उद्धव ठाकरे की ओर से प्रवक्ता संजय राउत ने यह भी कहा कि अगर एनसीपी व कांग्रेस से बागी गुट चाहता है कि गठबंधन तोड़ा जाए तो विधायक आएं और उनके कहे अनुसार किया जाएगा। लेकिन सारे प्रस्तावों को दरकिनार कर जब बागी गुट बीजेपी के साथ सरकार बनाने का मंथन शुरू किया तो उद्धव गुट सख्त हो गया। 

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