गुवाहाटी, असम. कुछ दिन पहले असम में 5 अलग-अलग उग्रवादी संगठनों के 1040 उग्रवादियों ने एक कार्यक्रम में सरेंडर कर दिया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी मौजूद थे। इन उग्रवादियों को समाज की मुख्य धारा में जोड़ा जाएगा। इस सबके बावजूद असम में उग्रवादी गतिविधियों की लगातार आशंका बनी हुई है। इसे देखते हुए असम में अगले 6 महीने के लिए AFSPA(Armed Forces-Special Powers Act) लागू कर दिया गया है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले असम के गवर्नर जगदीश मुखी ने 27 फरवरी से  इसे लागू करने का ऐलान किया है।

जानिए ऐसा क्यों

  • गवर्नर ने अगले 6 महीने के लिए पूरे राज्य को अशांत क्षेत्र घोषित किया है। हालांकि अगर राज्यपाल की अनुमति होगी, तो इसे 6 महीने से पहले भी हटाया जा सकता है।
  • सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह निर्णय लेना पड़ा है। राज्य में कुछ उग्रवादी संगठन सक्रिय हैं। पुलिस की लगातार सर्चिंग के दौरान यहां के कई इलाकों से बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है। राज्य की सीमा पर भी गतिविधियां देखी जा रही हैं। इससे अंदेशा है कि उग्रवादी विधानसभा चुनाव में विघ्न पैदा कर सकते हैं।
  • इलेक्शन को देखते हुए यहां बड़े नेताओं के दौरे शुरू हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां का दौरा कर चुके हैं। ऐसे में यह फैसला जरूरी था। बता दें कि  AFSPA नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी लागू है। इसके तहत सुरक्षाबल बिना वारंट के संदेश के आधार पर किसी की भी तलाशी ले सकते हैं या उसे गिरफ्तार कर सकते हैं।