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एमएमटीसी, एसटीसी, पीईसी को बंद करने या मिलाने के सभी विकल्प खुले हैं: गोयल

एमएमटीसी , एसटीसी और पीईसी का आपस में विलय कराने या उन्हें बंद करने जैसे सभी विकल्प खुले हैं।

All options to close or merge MMTC, STC, PEC are open: Goyal
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New Delhi, First Published Sep 17, 2019, 5:29 PM IST
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नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि उनके मंत्रालय के लिए अपने प्रशासन के अधीन आने वाले सावर्जनिक उपक्रमों एमएमटीसी , एसटीसी और पीईसी का आपस में विलय कराने या उन्हें बंद करने जैसे सभी विकल्प खुले हैं।

यहां एक व्यावसायिक सम्मेलन के दौरान अलग से गोयल से जब यह पूछा गया कि क्या सरकार इन तीनों उपक्रमों को बंद करने या इनका विलय करने के बारे में सोच रही है तो उनका जवाब था, ‘‘सभी विकल्प खुले हैं।’’ उन्होंने कहा कि इन इकाइयों को बनाने का उद्येश्य खत्म हो गया है। अब वे वस्तुओं के आयात/निर्यात के लिये माध्यम एजेंसी नहीं रह गयी हैं।

उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित सम्मेलन में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘सरकार का काम व्यवसाय करना नहीं है। ’’ उन्होंने कहा कि सोना आयात करने के लिए इतने बड़े तामझाम (एमएमटीसी) की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया, ‘‘बातचीत शुरू हो चुकी है। हम एक एक कर के कदम उठाएंगे।’’

वर्ष 1956 में गठित एसटीसी की पिछले वित्त वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी बैंकों के कर्ज का ब्याज नहीं चुका पा रही है और उसके ऋण खाते अवरुद्ध (एनपीए) घोषित किए जा चुके हैं। वर्ष के दौरान यह 881 करोड़ रुपये के शुद्ध घाटे में है। इससे एक साल पिछले वर्ष कंपनी 38 करोड़ रुपये के घाटे में है।

पीईसी का गठन एसटीसी की अनुषंगी के रूप में 1971 में किया गया था। यह कंपनी रेलवे और इंजीनियरिंग उपकरणों के निर्यात के लिए बनायी गयी थी। 1997 में इसे एक स्वतंत्र कंपनी बना दिया गया।

वर्ष 1963 में गठित एमएमटीसी खनिज और अयस्कों के निर्यात और अलौह धातुओं के आयात के वाहक का काम कर रही थी।

ये तीनों इकायां वाणिज्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं।

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