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बड़ा फैसला : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं

 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को धर्म परिवर्तन को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं है। इतना ही कोर्ट ने दो धर्मों के जोड़े की याचिका कर दी। हालांकि, अदालत ने उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराने की छूट दी है। 

allahabad High court says religion change for marriage only is not valid KPP
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Allahabad, First Published Oct 31, 2020, 7:57 AM IST
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प्रयागराज. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को धर्म परिवर्तन को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं है। इतना ही कोर्ट ने दो धर्मों के जोड़े की याचिका कर दी। हालांकि, अदालत ने उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराने की छूट दी है। 

दरअसल, कोर्ट में प्रियांशी उर्फ समरीन और अन्य ने एक याचिका दायर की थी, इसमें उन्होंने परिवार वालों को उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में दखल देने पर रोक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने इस याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। 
 
क्या कहा कोर्ट ने?
जस्टिस एमसी त्रिपाठी ने कहा, एक याचिकाकर्ता मुस्लिम तो दूसरा हिंदू है। लड़की ने 29 जून 2020 को हिन्दू धर्म स्वीकार किया और एक महीने बाद 31 जुलाई को विवाह कर लिया। कोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड से साफ है कि शादी करने के लिए धर्मपरिवर्तन किया गया।  कोर्ट ने नूरजहां बेगम केस के फैसले का हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने कहा कि शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है। इस केस में हिन्दू लड़की ने धर्म बदलकर मुस्लिम लड़के से शादी की थी।
 
यह इस्लाम के खिलाफ- कोर्ट
क्या हिंदू लड़की धर्म बदलकर मुस्लिम लड़के से शादी कर सकती है और यह शादी वैध होगी। कुरान का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा, इस्लाम के बारे में बिना जाने और बिना आस्था और विश्वास के केवल शादी करने के उद्देश्य से धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है। यह इस्लाम के खिलाफ है। इसी फैसले के हवाले से कोर्ट ने मुस्लिम से हिंदू बनकर शादी करने वाली याचिकाकर्ता को राहत देने से इनकार कर दिया है।

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