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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा के बाद अब लोकसभा में भी पास, पक्ष में 367 वोट पड़े

गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा के बाद मंगलवार को लोकसभा में अनुच्छेद 370 को लेकर संकल्प पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रपति यह घोषणा करते है उनके आदेश के बाद अनुच्छेद 370 के सभी प्रावधान जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे।

Amit Shah moves resolution to revoke Article370 in Jammu and Kashmir, in Lok Sabha
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New Delhi, First Published Aug 6, 2019, 11:31 AM IST
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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक राज्यसभा के बाद मंगलवार को लोकसभा में भी पास हो गया। इसके पक्ष में 367 वोट पड़े। विरोध में 67 सदस्यों ने वोटिंग की। इस बिल को सोमवार को ही राज्यसभा की मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही जम्मू-कश्मीर को बांटने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जम्मू-कश्मीर के दो भाग होंगे। पहला जम्मू-कश्मीर और दूसरा लद्दाख। दोनों केंद्रशासित राज्य होंगे। लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी। जबकि जम्मू-कश्मीर दिल्ली जैसा ही केंद्रशासित राज्य होगा।

इससे पहले मंगलवार सुबह गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा के बाद मंगलवार को लोकसभा में अनुच्छेद 370 को लेकर संकल्प पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत के राष्ट्रपति यह घोषणा करते है उनके आदेश के बाद अनुच्छेद 370 के सभी प्रावधान जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे। जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन विधेयक पर दिन भर चर्चा हुई। इस दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोक भी हुई। इस दौरान अमित शाह ने एक बार फिर भरोसा दिलाया कि स्थिति सामान्य होने पर जम्मू-कश्मीर एक बार फिर राज्य होगा। उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा करने में भाजपा को 70 साल नहीं लगेंगे।

370 कश्मीर को भारत से अलग करने का काम करता है- शाह
शाह ने कहा,  ''पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर हमारा दावा आज भी उतना ही मजबूत है, जितना पहले था। उसकी 24 की 24 सीटें हमारा हिस्सा रहने वाली हैं। मैं जो बिल लेकर सदन में उपस्थित आया हूं, उसमें अक्साई चिन और पीओके समेत एक-एक इंच जमीन का जिक्र है। हम कभी ये नहीं क्यों कहते कि पंजाब भारत का अभिन्न अंग है। हम कभी ये क्यों नहीं कहते है कि उत्तर प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है। सिर्फ कश्मीर के लिए ही ऐसा क्यों कहा जाता है? क्योंकि 370 उसको भारत से अलग करने का काम करता था। 370 की वजह से संसद का अख्तियार कश्मीर में कम होता है। देश का कानून वहां नहीं पहुंच पाता। पाकिस्तान कश्मीर के लोगों की भावनाओं को भड़काता है। 370 और 35 ए की वजह से कश्मीर में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। हमारी कई योजनाएं वहां नहीं पहुंच पाती हैं।''

अमित शाह ने कहा- किसी के दबाव में सेना नहीं हटाएंगे
शाह ने कहा, ''आप (विपक्ष) चाहते हो कि आप के दबाव में हम कश्मीर से सेना को हटा लें और वहां के हालात और बिगड़ जाए तो मैं साफ कर देना चाहता हूं कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला। न हम आपके दबाव में आएंगे और न ही वहां से सेना हटाएंगे और न ही घाटी के हालात बिगड़ने देंगे।'' 

कांग्रेस के इस सवाल पर नाराज हुए शाह
चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने पूछा कि क्या जम्मू-कश्मीर को हम आंतरिक मामला कह सकते हैं। जबकि यह मामला 1948 से ही यूएन के पास है। हमने शिमला समझौता किया, लाहौर घोषणा पर समझौता किया। यह आंतरिक मामला है या फिर द्विपक्षीय मामला। इस पर शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग, इसको लेकर कोई विवाद नहीं है। जब हम जम्मू-कश्मीर की बात करते हैं, तो इसमें पीओके भी शामिल होता है। शाह ने इस दौरान कांग्रेस से पूछा कि क्या आप पीओके को जम्मू-कश्मीर का हिस्सा नहीं मानते। शाह ने आगे कहा कि हम इसके लिए जान भी दे देंगे। गृह मंत्री ने बताया कि संसद पर जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई भी फैसला करने का पूरा अधिकार है।

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राज्यसभा में पास हुआ पुनर्गठन बिल
मोदी सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प पेश किया था। शाह ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक भी पेश किया। इसके पक्ष में 125 वोट पड़े, विरोध में 61 वोट डाले गए। सरकार अब इसे लोकसभा में पास कराएगी। हालांकि, लोकसभा में यह आसानी से पास हो जाएगा। इससे पहले जम्मू-कश्मीर आरक्षण संसोधन बिल ध्वनिमत के साथ पास हुआ। 

'पाक से आने वाले शरणार्थी भारत के प्रधानमंत्री बने'
शाह ने कहा था, ''पाकिस्तान से आने वाला शरणार्थी भारत का प्रधानमंत्री तो बन सकता है, लेकिन कश्मीर का नागरिक नहीं बन सकता। उन्होंने कहा, बंटवारे के बाद देशभर में पाकिस्तान से निराश्रित आए। कुछ पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों में गए। जम्मू-कश्मीर में जो शरणार्थी गए, उन्हें आज तक वहां की नागरिकता भी नहीं मिली। वहीं, देश में पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थी भारत के प्रधानमंत्री जरूर बने। मनमोहन सिंह और इंद्र कुमार गुजराल।''

'जम्मू-कश्मीर के विकास और शिक्षा में भी धारा 370 बाधक बनी'
शाह ने कहा था, ''सदन में सदस्यों ने अलग-अलग प्रकार से अपने विचार रखे। ज्यादातर बातें तकनीकी पहलुओं पर हुईं, उसकी उपयोगिता पर नहीं। धारा 370 हटने से भारत और विशेषकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को क्या मिलने वाला है वो किसी ने नहीं कहा। धारा 370 ने घाटी के लोगों का नुकसान किया। गृह मंत्री ने कहा,  370 की वजह से वहां लोकतंत्र नहीं पनपा, भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया। गरीबी घर गई घाटी में, घाटी के गांवों को देखो तो आंखों में आंसू आ जाते हैं। जम्मू-कश्मीर के विकास और शिक्षा में भी धारा 370 बाधक है। ये महिला, दलित और आदिवासी विरोधी है। आतंकवाद की जड़ भी यही धारा 370 ही है।''

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