देश की सरकारें आधुनिकता और बुलेट ट्रेनों की बातें करती हैं। देश के विकास के नाम पर ऐसा लगता है कि ये विकास महज शहरों में ही किया जा रहा है। गांवों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे है। दरअसल, ये बातें हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है।

हैदराबाद. देश की सरकारें आधुनिकता और बुलेट ट्रेनों की बातें करती हैं। देश के विकास के नाम पर ऐसा लगता है कि ये विकास महज शहरों में ही किया जा रहा है। गांवों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे है। दरअसल, ये बातें हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में बदहाल व्यवस्था की तस्वीर सामने आई है। यहां पर एस कोटा मंडल की दारापर्ती पंचायत के पल्लपु डूंगडा गांव में एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए 11 किमी खाट पर पैदल लेकर जाया गया। 

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गांव में नहीं है कोई सड़क

गांव में सड़क ना होने के कारण कोई ऐंबुलेंस गांव तक नहीं जाती है। गांव संपर्क मार्गों से कटा हुआ है। कोई वाहन भी नहीं चलते हैं। ऐसे में लोग एमरजेंसी में भी कई किमी पैदल चलने को मजबूर होते हैं। गर्भवती महिला दर्द से तड़पती रही। उसके घरवालों ने महिला को खाट पर लिटाया। उसे चारों तरफ से चादर से ढका और कंधे पर लटकाकर पैदल उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए अस्पताल लेकर पहुंचे।

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10-11 किमी की दूरी पर स्थित है सड़क 

ग्रामीणों ने कहा कि 'उनके गांव से दस-ग्यारह किमी की दूरी पर स्थित डाबागुंता गांव में सड़क की सुविधा है, जहां से वो उसे एक ऑटो रिक्शा में एस कोटा सरकारी अस्पताल ले गए। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे गर्भवती महिला को टांगकर गांववाले ले जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी से अनुरोध किया है कि वो उनके गांव को एक उचित सड़क सुविधा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि 'जगन अन्ना, हम आप पर विश्वास करते हैं। आप हमें अच्छी सड़क प्रदान करें। यह हमारे लिए उपयोगी होगा।'