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जेल से रिहा हुए अर्नब गोस्वामी, समर्थकों में दौड़ी खुशी की लहर; बोले- ये पूरे भारत की जीत

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। इंटीरियर डिजाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार अर्नब गोस्वामी को 7 दिन बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी।

Arnab Goswami released from jail supporters shouted slogans said this is the victory of the whole of India kpl
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Mumbai, First Published Nov 11, 2020, 10:38 PM IST
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मुंबई. रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। इंटीरियर डिजाइनर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार अर्नब गोस्वामी को 7 दिन बाद बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी। तलोजा जेल से बाहर निकलते ही रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब कार की छत पर बैठ गए। वहीं उनके जेल से बाहर आने के पहले ही वहां सैकड़ों समर्थकों की भीड़ जमा हो गई। अर्नब ने नारे लगाते हुए अपनी रिहाई को पूरे भारत के लोगों की जीत बताया।

अर्नब के साथ ही इस मामले में दो अन्य आरोपियों नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख को भी जमानत दी गई है। अर्नब की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उद्धव सरकार को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारें किसी को निशाना बनाएं तो उन्हें यह महसूस होना चाहिए कि हम उसकी हिफाजत करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर से जमानत के आदेश पर तत्काल अमल करने को कहा। अर्नब अपनी जमानत के लिए हाईकोर्ट भी गए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने उनसे कहा था कि अंतरिम जमानत के लिए उनके पास लोअर कोर्ट का भी विकल्प है, लेकिन 4 नवंबर को गिरफ्तारी के बाद ही अलीबाग सेशन कोर्ट ने उनकी जमानत नामंजूर कर दी थी। हालांकि, अलीबाग कोर्ट ने पुलिस को रिमांड न देते हुए अर्नब को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई को बताया गलत 
अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कोर्ट में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा हमारा लोकतंत्र असाधारण रूप से लचीला है। महाराष्ट्र सरकार को यह सब नजरअंदाज करना चाहिए।अगर किसी व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जाता है, तो यह न्याय का दमन होगा। क्या महाराष्ट्र सरकार को इस मामले में कस्टडी में लेकर पूछताछ की जरूरत है। हम व्यक्तिगत आजादी के मुद्दे से जूझ रहे हैं। कोर्ट ने कहा आज अगर अदालत दखल नहीं देती है तो हम विनाश के रास्ते पर जा रहे हैं। इस आदमी (अर्नब) को भूल जाओ। आप उसकी विचारधारा नहीं पसंद कर सकते। हम पर छोड़ दें, हम उसका चैनल नहीं देखेंगे। सबकुछ अलग रखें। कोर्ट ने कहा अगर हमारी राज्य सरकारें ऐसे लोगों के लिए यही कर रही हैं, इन्हें जेल में जाना है तो फिर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना होगा।

हाईकोर्ट पर भी की टिप्पणी 
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के बारे में कहा कि HC को एक संदेश देना होगा। कृपया, व्यक्तिगत आजादी को बनाए रखने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करें। हम बार-बार देख रहे हैं। अदालत अपने अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल में विफल हो रही हैं। लोग ट्वीट के लिए जेल में हैं। HC ने अर्नब को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा था- खुदकुशी करने वाले इंजीनियर की पत्नी की बात सुने बिना जमानत पर विचार नहीं किया सकता है।

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