अरुण जेटली ने 1977 में वकालत की प्रेक्टिस शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने वकालत की दुनिया में खूब नाम कमाया। इसके अलावा वे राजनीति में भी एक्टिव रहा करते थे।


नई दिल्ली. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का 66 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में शनिवार को कैंसर की बीमारी के चलते निधन हो गया। जेटली काफी लंबे समय से बीमार थे। एम्स की तरफ से शुक्रवार 9 अगस्त, 2019 की रात 9 बजे जेटली की मेडिकल रिपोर्ट जारी गई थी। एम्स के डॉक्टरों के अनुसार, जेटली आईसीयू में कई डॉक्टरों की निगरानी में थे। इसके बाद उनकी तबीयत भी स्थिर बताई जा रही थी। क्या आप जानते हैं कि कभी और नौजवानों की तरह अरुण जेटली भी सीए बनने का ख्वाब देखते थे लेकिन वकील कैसे बने। आइए हम आपको बताते हैं उनसे जुड़े किस्से...

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इस एक वजह से बने कानून के प्रख्यात जानकार

अरुण का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली में हुआ था। वो बचपन से ही पढ़ाई में सबसे आगे रहते थे। अरुण का सपना वकील नहीं बल्कि सीए बनने का था और इसीलिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इकोनॉमिक्स में बीए की पढ़ाई की थी लेकिन बाद में उनका रुझान कानून की तरफ हो गया और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की। कॉलेज में ही पढ़ाई के दौरान अरुण राजनीति से जुड़ने लगे थे। देश में जो कुछ भी चल रहा होता था उनसे उनके युवा मन पर प्रभाव पड़ता था। बाद में पढ़ाई के दौरान अरुण दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष भी बने।

जनता पार्टी के यूथ विंग के बने थे अध्यक्ष

अरुण जेटली ने 1977 में वकालत की प्रेक्टिस शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने वकालत की दुनिया में खूब नाम कमाया। इसके अलावा वे राजनीति में भी एक्टिव रहा करते थे। इसी वजह से राजनीति भी बांहे फैलाए इनके स्वागत का इंतजार कर रही थी। फिर वे जनता पार्टी के यूथ विंग के अध्यक्ष बनाए गए। उसी वक्त 1980 में ही भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया था। अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने युवाओं को पार्टी से जोड़ने का काम बखूबी किया। बता दें, बोफोर्स घोटाले से जुड़ी कार्रवाई अरुण जेटली ने ही की थी। इस घोटाले में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का भी नाम था।