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बाबरी विध्वंस केस: '32 लोगों ने ढांचा बचाने की कोशिश की' इन वजहों से सभी आरोपियों को किया गया बरी

28 साल बाद बाबरी विध्वंस केस में अहम फैसला आया है। लखनऊ स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 6 दिसंबर को गिराए गए विवादित ढांचे को लेकर जज सुरेंद्र कुमार यादव ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी।

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Lucknow, First Published Sep 30, 2020, 1:12 PM IST
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लखनऊ. 28 साल बाद बाबरी विध्वंस केस में अहम फैसला आया है। लखनऊ स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 6 दिसंबर को गिराए गए विवादित ढांचे को लेकर जज सुरेंद्र कुमार यादव ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। इसलिए, सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है। इस केस में आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 48 लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई थी, जिसमें 16 लोगों का निधन हो चुका है।

इन वजहों से बरी हुए सभी 32 आरोपी 

2300 पन्नों के जजमेंट में सीबीआई कोर्ट ने माना कि यह घटना अचानक हुई थी। इसे पहले से प्लान नहीं किया गया था। बल्कि कोर्ट ने कहा, 'जिन 32 लोगों पर केस दर्ज कराया गया था उन्होंने तो मस्जिद के ढांचे को बचाने की कोशिश की थी।' इसके साथ ही कहा गया कि 'फोटो, विडियो का साक्ष्य मंजूर नहीं हैं और इनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। बाबरी के ढांचे को अराजक तत्वों ने तोड़ा था।' 

कोर्ट ने क्या कहा?

- घटना अचानक हुई थी
-फोटो से कोई आरोपी साबित नहीं हो सकता
-अराजक तत्वों ने ढांचा तोड़ा था
-पूर्व नियोजित घटना नहीं
-फोटो, विडियो का साक्ष्य मंजूर नहीं
-32 लोगों ने ढांचा बचाने की कोशिश की
- आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं

6 आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं थे, वीडियो के जरिए फैसला सुना

कोर्ट में 6 आरोपी मौजूद नहीं हैं। लालकृष्ण आडवाणी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट का फैसला सुना। वहीं, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, शिवसेना के पूर्व सांसद सतीश प्रधान, महंत नृत्य गोपाल दास, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी कोर्ट नहीं पहुंचे। इनके अलावा अन्य सभी आरोपी मौजूद हैं।

आज फैसला सुनाने वाले जज का रिटायरमेंट है आज 

फैसला सुनाने वाले जज सुरेंद्र कुमार यादव का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। इस मामले पर फैसला सुनाने के साथ ही वो रिटायर हो जाएंगे। इससे पहले वो 30 सितंबर 2019 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 30 सितंबर 2020 तक सेवा विस्तार दिया।

फैसला सुनाने से पहले अयोध्या में हाई अलर्ट

फैसला आने से पहले अयोध्या में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। डीआईजी दीपक कुमार ने बताया कि सीआईडी और एलआईयू की टीमें सादी वर्दी में तैनात कर दी गई हैं। बाहरी लोग अयोध्या में आकर माहौल न बिगाड़ने पाएं इसको लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि पूरे जिले में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। वहीं, लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत के बाहर करीब 2 हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा प्रदेश के 25 संवेदनशील जिलों में सुरक्षा व्‍यवस्‍था तगड़ी कर दी गई है।

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