ईडी ने 16 अक्टूबर को तिहाड़ जेल में चिदंबरम से पूछताछ की थी और उसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था।

नई दिल्ली: पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉंड्रिंग मामले में जमानत के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में अर्जी दी। आईएनएक्स मीडिया मामले में उन्हें उच्चतम न्यायालय ने जमानत दे दी थी। चिदंबरम को सीबीआई ने इस मामले में 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। लेकिन चिदंबरम अभी भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं। एजेंसी ने उन्हें 17 अक्टूबर को हिरासत में लिया था।

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मीडिया भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार हुए थे चिदंबरम 

सीबीआई ने 15 मई 2017 को एक प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की ओर से मिली मंजूरी में गड़बड़ियां करने का आरोप लगाया गया था। 2007 में चिदंबरम वित्त मंत्री थे। इसके बाद ईडी ने इस संबंध में 2017 में धनशोधन का एक मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में 18 अक्टूबर को आरोप पत्र दायर किया था जिसमें चिदंबरम और अन्य का नाम आरोपियों के तौर पर शामिल किया था।

निचली अदालत ने 21 अक्टूबर को आरोप पत्र का संज्ञान लिया था और 22 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने इस मामले में उन्हें जमानत दे दी थी।

चिदंबरम के बेटे समेत अन्य आरोपियों को मिली जमानत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने धनशोधन मामले में जमानत मांगी और कहा है कि वह न तो ‘भागने के जोखिम’ वाले हैं और न ही मुकदमे की सुनवाई से उनके भागने की आशंका है। इसके अलावा अग्रिम जमानत देने से पहले शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि चिदंबरम अदालत से इजाजत लिए बिना देश से बाहर नहीं जा सकते और जांच एजेंसी जब-जब पूछताछ के लिए बुलाएगी, उन्हें पेश होना होगा। अपनी अर्जी में उन्होंने यह भी कहा है कि सीबीआई और ईडी के मामले एक ही वित्तीय लेनदेन से जुड़े हैं इसलिए दोनों के लिए अलग हिरासत (रिमांड) नहीं हो सकती। उन्होंने राहत पाने के लिए एक और आधार बताया है जिसके मुताबिक आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में उनके बेटे कार्ति चिदंबरम समेत अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)