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चीन का धोखा: रक्षा मंत्री के साथ आधे घंटे तक विदेश मंत्री और सीडीएस की बैठक, दिन में दूसरी बड़ी मीटिंग

लद्दाख में एलएसी पर भारतीय और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई है। इस झड़प में एक अधिकारी समेत तीन भारतीय जवान शहीद हो गए हैं। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास से विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा स्टाफ के प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम की आधे घंटे तक मीटिंग हुई। यह एक दिन में लगातार दूसरी समीक्षा बैठक थी।

Chief of Defense Staff arrives at Defense Minister Rajnath Singh house on India-China dispute kpn
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New Delhi, First Published Jun 16, 2020, 6:32 PM IST
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नई दिल्ली. लद्दाख में एलएसी पर भारतीय और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई है। इस झड़प में एक अधिकारी समेत तीन भारतीय जवान शहीद हो गए हैं। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास से विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा स्टाफ के प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम की करीब आधे घंटे मीटिंग हुई। यह एक दिन में लगातार दूसरी समीक्षा बैठक थी। 

- लद्दाख में चीनी के साथ भारतीय सेना की झड़प के बाद भी चीन अपन हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वहां की सेना (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) के वेस्टर्न थियेटर कमांड के प्रवक्ता ने उल्टे भारतीय सेना के जवानों पर ही सीमा पार कर हमला करने का आरोप लगाया है। ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में यह आरोप लगाया गया। 

कांग्रेस ने क्या प्रतिक्रिया दी?
लद्दाख में चीनी सैनिकों के साथ झड़प में सेना के जवानों की मौत के बाद केंद्र सरकार पर कांग्रेस हमलावर हुई। कांग्रेस ने कहा, ऐसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं। पीएम नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चुप्पी तोड़ें।

ओवैसी ने कहा, शहादत का बदला लें
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने लद्दाख में चीनी सैनिकों से झड़के के बाद 1 अफसर और 2 सैनिकों की शहादत पर शोक जताया। सरकार जवानों की शहादत का बदला ले, हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए।

1975 के बाद पहली बार ऐसी घटना हुई
1975 के बाद पहली बार वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जानमाल का नुकसान हुआ है। इससे पहले 1975 में एलएसी पर अरुणाचल प्रदेश में गोली चली थी। इस दौरान 4 भारतीय जवान शहीद हुए थे। इसके बाद कभी दोनों देशों के बीच फायरिंग नहीं हुई।

5 हफ्तों से भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने

बीते पांच हफ्तों से गलवान घाटी समेत पूर्वी लद्दाख के कई इलाकों में बड़ी संख्या में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने थे। यह घटना भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के उस बयान के कुछ दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के सैनिक गलवान घाटी से पीछे हट रहे हैं।

चीन के अखबार ने उल्टा भारत पर लगाया आरोप

चीन की सरकार द्वारा संचालित समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक खबर में दावा किया भारतीय सैनिकों ने झड़प की शुरुआत की। वे चीनी क्षेत्र में घुस आए और चीन के सैनिकों पर हमला कर दिया।

- भारतीय और चीनी सेना के बीच पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलतबेग ओल्डी में तनाव चल रहा है। बड़ी संख्या में चीनी सैनिक वास्तविक सीमा पर पैंगोंग झील सहित कई भारतीय क्षेत्रों में घुस आए थे। भारत ने इसका कड़ा विरोध करते हुए चीनी सैनिकों को इलाके में शांति बहाल करने के लिये तुरंत पीछे हटने के लिये कहा। दोनों देशों के बीच इस विवाद को सुलझाने के लिये बीते कुछ दिनों में कई बार बातचीत हो चुकी है।

विवाद खत्म करने के लिए 7 घंटे हुई थी बात

इस विवाद को खत्म करने के लिये पहली बार गंभीरता से प्रयास करते हुए लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और तिब्बत सैन्य जिले के मेजर जनरल लीयू लिन ने छह जून को करीब सात घंटे तक बैठक की थी। बैठक के बाद मेजर जनरल स्तर की दो दौर की वार्ता हुई।

 क्या है विवाद?

चीन ने लद्दाख के गलवान नदी क्षेत्र पर अपना कब्जा बनाए रखा है। यह क्षेत्र 1962 के युद्ध का भी प्रमुख कारण था। इसका विवाद को सुलझाने के लिए कई स्तर की बातचीत भी हो चुकी है। 6 जून को दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल लेवल की बैठक हुई थी। हालांकि, अभी विवाद पूरी तरह से निपटा नहीं है।

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