नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति को लेकर सुनवाई की। इस दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने 9 याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान एक याचिकाकर्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट आम आदमी की पहुंच से दूर है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि ये मामला बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे खुद श्रीनगर जाएंगे।

दरअसल, बाल अधिकार समाजिक कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली ने जम्मू-कश्मीर में जेल में बंद 18 साल से कम उम्र के लड़कों से संबंधित उन केसों की जानकारी मांगी थी, जिन्हें हाई कोर्ट कमेटी देख रही है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप इस मामले में हाईकोर्ट में अप्रोच करें। 

इनाक्षी की ओर से पेश वकील हुसेफा अहमदी ने कहा कि हाईकोर्ट में पहुंचना बेहद मुश्किल है। क्यों कि अदालत आम आदमी की पहुंच से दूर है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर आप लोग हाईकोर्ट में अपील नहीं कर पा रहे हैं तो ये गंभीर मामला है। 

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से फोन पर बात करेंगे सीजेआई
चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट मांगी। इसमें उन्होंने पूछा कि क्या हाईकोर्ट अपीलकर्ताओं की पहुंच में है या नहीं? चीफ जस्टिस ने कहा कि वे निजी तौर पर खुद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से फोन पर बात करेंगे। साथ ही उन्होंने सख्त लहजे में याचिकाकर्ता से कहा कि अगर ये दावा गलत निकला तो इसका परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे खुद श्रीनगर जाकर देखेंगे कि क्या लोगों को जम्मू कश्मीर हाइकोर्ट अप्रोच करने में परेशानी हो रही है?

दो हफ्ते में जवाब दे केंद्र
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा कि कश्मीर में क्या हो रहा है? बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह जम्मू कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए हरसंभव प्रयास करे, इस बात को भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि यह बहुत संवेदनशील मामला है। साथ ही सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को भी ध्यान में रखकर कदम उठाए।