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कोरोना का खौफ : पैरोल पर कैदयों को किया जा सकता है रिहा, SC ने सभी राज्यों को कमेटी गठित करने के दिए निर्देश

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कैदियों की रिहाई के लिये यह उच्च स्तरीय समिति राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के परामर्श से काम करेगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के मद्देनजर जेलों में भीड़ कम करने के इरादे से इन कैदियों की रिहाई की जा रही है।

Corona's awe: Prisoners can be released on parole, SC instructs all states to set up committee kpm
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New Delhi, First Published Mar 23, 2020, 5:42 PM IST
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नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस के प्रकोप से चिंतित उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को उच्चस्तरीय समितियां गठित करने का निर्देश दिया जो कैदियों की उस श्रेणी का निर्धारण करे जिन्हें चार से छह सप्ताह के लिये पैरोल पर रिहा किया जा सकता है।

देश जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी हैं

शीर्ष अदालत ने देश की जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी होने की वजह से उनमें कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के इरादे यह निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि जिन कैदियों को सात साल की कैद हुई है या जिनके खिलाफ सात साल तक की कैद की सजा के अपराध में अभियोग निर्धारित हो चुके हैं, उन्हें जेलों में भीड़ कम करने के प्रयास में रिहा किया जा सकता है।

जेल में भीड़ कम करने के लिए कैदियों को रिहा किया जा सकता है

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कैदियों की रिहाई के लिये यह उच्च स्तरीय समिति राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के परामर्श से काम करेगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के मद्देनजर जेलों में भीड़ कम करने के इरादे से इन कैदियों की रिहाई की जा रही है।

शीर्ष अदालत ने कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुये देश की जेलों में क्षमता से कहीं ज्यादा कैदी होने के तथ्य का 16 मार्च को स्वत: संज्ञान लिया था और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे को इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया था।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

(फाइल फोटो)

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