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बलात्कारियों की रिहाई पर बोली बिलकिस बानो की वकील- रेप का हर दोषी अब छूट के लिए आवेदन करेगा

बिलकिस बानो बलात्कार मामले (Bilkis Bano rape case) में दोषियों को रिहा किए जाने पर बिलकिस बानो की वकील शोभा गुप्ता ने दुख जताया है। उन्होंने कहा कि अब तो बलात्कार और हत्या का हर दोषी छूट के लिए आवेदन करेगा।
 

Every rape convict will now apply for remission Bilkis Bano on release of rapists vva
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New Delhi, First Published Aug 18, 2022, 4:56 PM IST

नई दिल्ली। बिलकिस बानो बलात्कार मामले (Bilkis Bano rape case) में 11 दोषियों को गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत रिहा किए जाने के कुछ दिनों बाद उनकी वकील शोभा गुप्ता ने इस कदम की आलोचना की। शोभा ने कहा कि इसके बाद बलात्कार और हत्या का हर दोषी छूट के लिए आवेदन करेगा। 

शोभा ने कहा कि मुझे लगता है कि हर बलात्कार और हत्या का दोषी 14 साल बाद छूट के लिए आवेदन करेगा। अगर इस मामले में छूट दी जा सकती है तो हर बलात्कार का दोषी माफी क्यों नहीं मांगेगा? शोभा गुप्ता ने यह भी कहा कि छूट का कानून सही नहीं है। यह अधिकार का मामला नहीं है। 1992 की नीति, जिसके तहत दोषियों को रिहा किया गया था, अब मौजूद नहीं है।

क्या है बिलकिस बानो कांड?
बिलकिस बानो के साथ 20 साल की उम्र में बलात्कार किया गया था। उस समय वह कई महीनों की गर्भवती थी। रेप करने वाले पुरुषों को वह कई साल से जानती थी। उनमें से एक को वह चाचा और एक को भाई कहती थी। उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था, जिससे वह लगभग बेजान हो गई थी। जब उसे होश आया तो देखा कि उसके परिवार के सदस्य मारे जा रहे हैं। उनकी तीन साल की बेटी की भी 3 मार्च 2002 को हत्या कर दी गई थी।

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होश में आने पर बिलकिस ने एक आदिवासी महिला से कपड़े लिए थे और दाहोद जिले के लिमखेड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराने गई थी। वहां के हेड कांस्टेबल ने तथ्यों को छिपाया था केस हल्का कर लिखा था। केस दर्ज कराने के बाद उसे हत्या की धमकियां मिलीं, जिसके बाद 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे को गुजरात से मुंबई ट्रांस्फर कर दिया था। 

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जनवरी 2008 में मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 20 में से 11 आरोपियों को एक गर्भवती महिला से बलात्कार की साजिश, हत्या, गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। हेड कांस्टेबल को आरोपी को बचाने के लिए "गलत रिकॉर्ड बनाने" के लिए दोषी ठहराया गया था। 20 में से सात आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

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