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सरकार के साथ बैठक खत्म, कृषि मंत्री ने कहा- MSP जारी थी, है और रहेगी, किसानों के साथ 9 दिसंबर को अगली बैठक

कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर जमे किसान संगठनों और सरकार के बीच आज पांचवें दौर की बैठक हुई। यह बैठक 5 घंटे चली। बताया जा रहा है कि बैठक में किसानों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन पाई है। सोमवार को फिर से अगले दौर की बैठक हो सकती है। विज्ञान भवन में हुई बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

fifth round of talks between the government and farmers will be held today in Kisan agitation kpl
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New Delhi, First Published Dec 5, 2020, 7:44 AM IST
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नई दिल्ली. कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर जमे किसान संगठनों और सरकार के बीच आज पांचवें दौर की बैठक हुई। यह बैठक 5 घंटे चली। बताया जा रहा है कि बैठक में किसानों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन पाई है। सोमवार को फिर से अगले दौर की बैठक हो सकती है। विज्ञान भवन में हुई बैठक में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल भी मौजूद रहे।

बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, हमने कहा है कि MSP जारी रहेगी। MSP पर किसी भी प्रकार का खतरा और इस पर शंका करना बेबुनियाद है अगर फिर भी किसी के मन में शंका है तो सरकार उसका समाधान करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि एमएसपी जारी थी, है और रहेगी। 

सरकार के साथ किसान कानूनों को लेकर हुई किसानों की बैठक पर नेगोशिएटर हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा, उम्मीद है की 9 दिसंबर को 11 बजे कोई न कोई हल आ जाएगा और आंदोलन समाप्त हो जाएगा।

बैठक में क्या बातचीत हुई?

- बैठक के दैरान किसानों ने कहा, वे अब इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते। अब उन्हें भरोसा और समाधान चाहिए। वहीं, सरकार ने कहा, एमएसपी जारी रखने की लिखित गारंटी देने और आपत्तियों में बदलाव के लिए तैयार है। लेकिन किसान तीनों कानून वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। 5 घंटे की बातचीत के दौरान किसान एक बार तो मौन हो गए। उन्होंने लिखकर सरकार के साथ यस या नो के सिर्फ दो विकल्प रखे। किसानों ने बताया कि 8 दिसंबर को भारत बंद है इसलिए अगली बैठक 9 दिसंबर को रखी गई है।

- किसानों ने कहा, हम कॉरपोरेट फार्मिंग नहीं चाहते हैं। इस कानून से सरकार को फायदा होगा, किसान को नहीं।

- किसानों ने कहा, हमारे पास इतना राशन है कि हम एक साल तक प्रदर्शन जारी रख सकते हैं। हम पिछले कई दिनों से रोड पर हैं। अगर सरकार चाहती है, कि हम सड़क पर रहें तो हमें कोई परेशानी नहीं है। हम अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ेंगे। 

-  केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, मैं सभी से अपील करता हूं कि वृद्धों और बच्चों से प्रदर्शन स्थल से घर जाने के लिए कहें। 

- तोमर ने बताया कि किसानों और सरकार के बीच अगले दौर की बैठक 9 दिसंबर को होगी।

- इस  बैठक में किसानों ने एक बार फिर अपना लाया हुआ खाना खाया। यह खाना किसान अपने साथ लाए थे। इससे पहले गुरुवार को भी किसानों ने सरकारी के बजाय अपना लाया खाना खाया था।

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विज्ञान भवन में अपने साथ लाया खाना खाते किसान।


सिंघु बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन में शामिल हुए एक्टर दिलजीत दोसांझ।
 


किसानों की मांग है कि जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, तब तक प्रदर्शन बंद नहीं करेंगे।

 बिलासपुर और उत्तराखंड के किसान भी गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शनों में शामिल होने पहुंचे।


 

किसानों से बात करते केंद्रीय मंत्री


इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर मीटिंग बुलाई। इसमें राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह के साथ ही कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और कैबिनेट मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल हुए। इससे पहले सरकार ने ये आशा जताई थी कि कई मामले पर किसान सहमत हैं, ऐसे में पांचवे दौर की बातचीत में हल निकल सकता है।

किसानों ने बुलाया भारत बंद
उधर किसान संगठन कानून को पूरी तरह वापस लेने पर अड़े हैं। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की गई है। शुक्रवार को सिंघु सीमा पर हुई महापंचायत के बाद किसान संगठनों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का एलान किया। इसके साथ ही चेतावनी दी कि यदि नए कृषि कानून वापस नहीं लिए गए तो किसानों के हक में पूरा भारत बंद होगा। साथ ही देशभर के सभी टोल फ्री कर दिए जाएंगे। बृहस्पतिवार को हुई चौथे दौर की वार्ता  बेनतीजा रहने के बाद शुक्रवार को लगातार नौंवे दिन किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं बैठे रहे।

किसानों के समर्थन में 35 खिलाड़ियों ने किया अवार्ड लौटाने का ऐलान
कृषि कानूनों के विरोध में जारी किसानों के प्रदर्शनों को खिलाड़ियों काी भी खूब समर्थन मिल रहा है। अब हॉकी इंडिया के पूर्व कप्तान परगट सिंह ने अवार्ड वापसी का ऐलान किया है। परगट सिंह 2 बार ओलंपिक में भारत का नेतृत्व कर चुके हैं। वे जालंधर कैंटॉनमेंट से कांग्रेस विधायक भी हैं। उन्हें 1998 में पद्म श्री अवार्ड मिला था। इसके अलावा सज्जन सिंह चीमा (अर्जुन अवार्ड), राजबीर कौर, करतार सिंह (पद्म श्री), गुरमेल सिंह (ओलंपिक मेडलिस्ट), ओलंपिक मेडलिस्ट समेत 35 खिलाड़ियों ने अवार्ड वापसी का ऐलान किया है। इन सभी महान खिलाड़ियों का कहना है कि वो 5 दिसंबर को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में जाकर अपना अवार्ड वापस करेंगे।

सरकार से बातचीत के पहले किसानों के बीच आपसी बैठक 
कृषि कानूनों पर बृहस्पतिवार को सरकार से हुई बातचीत पर चर्चा के लिए शुक्रवार सुबह पहले सिंघु बॉर्डर पर पंजाब के किसान संगठनों की बैठक हुई। इसके बाद देशभर से आए किसान नेताओं ने बैठक कर शनिवार की वार्ता के लिए रणनीति बनाई। बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया, सरकार कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है, लेकिन हमने साफ कहा है कि इन्हें वापस लेना होगा। किसान नेता हरिंदर पाल लखोवाल ने कहा, सरकार से कह दिया गया है कि कानून वापस लें। यदि मांग पूरी नहीं होती तो आठ दिसंबर को भारत बंद किया जाएगा। 

आज पूरे देश में जलाए जाएंगे कॉरपोरेट के पुतले 
किसानों ने शनिवार को पूरे देश में सरकार और कॉरपोरेट के पुतले जलाए जाने का ऐलान किया है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, शनिवार को अगर सरकार हमारी बात नहीं मानती तो आंदोलन और बढ़ाएंगे। अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हनान मोल्लाह ने कहा, सरकार को तीनों कानूनों को वापस लेना होगा। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, जब तक सरकार किसानों की बात नहीं मानती आंदोलन जारी रहेगा। 

बॉक्सिंग कोच संधू लौटाएंगे द्रोणाचार्य अवार्ड
किसानों के समर्थन में शुक्रवार को भी हस्तियों ने पुरस्कार और सम्मान वापस किए। भारत को पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाले राष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच गुरबक्स सिंह संधू ने कहा, अगर सरकार किसानों की मांग नहीं मानती तो वे द्रोणाचार्य अवार्ड लौटा देंगे। साहित्य अकादेमी पुरस्कार जीतने वाले डॉ मोहनजीत, डॉ जसविंदर सिंह और पंजाबी पटकथा लेखक स्वराजबीर ने पुरस्कार वापस करने की घोषणा की।

राष्ट्रपति को पत्र-दिल्ली के लोग बंधक बने
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर दिल्ली के लोगों की समस्या का संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने लिखा, दिल्ली के प्रवेश द्वारों पर जुटे किसानों ने दिल्लीवासियों को बंधक बना दिया है। आप से अपील है कि इस मामले में दखल देकर दिल्लीवासियों की चिंता दूर करें।

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