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सामूहिक चिता बनी दिल्ली की तीन मंजिला इमारत, चौड़ी होतीं गालियां तो बचा लिए जाते और भी लोग

नई दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी में तीन मंजिला इमारत में स्थापित फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 43 लोगों की मौत हो गई है। इन सब के बीच राहत कार्य में जुटे दमकल कर्मियों ने बताया कि तंग गलियों के कारण अंदर फंसे लोगों को बचाने में देरी हुई। बचाव दल का कहना है कि चौड़ी गलियां होती तो और लोगों को भी बचाया जा सकता था। 

Fire in Delhi grain market at Rani Jhansi Road, many people were killed, some people were rescued kps
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New Delhi, First Published Dec 8, 2019, 12:40 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के रानी झांसी रोड स्थित अनाज मंडी अग्निकांड को लेकर धीरे-धीरे परत दर परत खबरें सामने आने लगी हैं। रविवार की तड़के सुबह हुए इस भयावह घटना में 43 लोगों की मौत हो गई। शनिवार की रात सोए लोगों रविवार की सुबह नहीं देख पाए अभी वो सो ही रहे थे कि आग के चपेट में आ गए। इन सब के बीच आग की सूचना मिलने पर मौके पर फायर बिग्रेड की गाड़ियां पहुंच गईं। बावजूद इसके आग में बचे अधिकांश लोगों को सुरक्षित नहीं बचाया जा सका। 

तंग गलियां बनी बड़ी वजह

दिल्ली की तंग गलियों ने अधिकांश जानों को लीलने में अहम भूमिका निभाई। बचाव अधिकारियों की मानें तो तंग गलियों के कारण बचाव कार्य शुरू करने में देरी हुई जिसके कारण लोगों को राहत देने में देरी हुई। जिससे लोग आग में घिरते जा गए और दम घुटने के कारण अधिकांश लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि सकरी गलियां न होती तो अधिकांश लोगों को मरने से बचाया जा सकता था। 

दूसरे मंजिल पर लगी थी आग 

आग शॉर्ट सर्किट की वजह से दूसरी मंजिल के मुख्य दरवाजे के पास लगी थी। जिस समय आग लगी उस वक्त मुख्य दरवाजे का शटर बंद था। इसके चलते फैक्टी में सो रहे लोग आग के बीच बुरी तरह से फंस गए और बाहर भाग नहीं पाए। ऐसे में दम घुटने से 43 लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने पिछे की खिड़की के जाल को काटकर लोगों को रेस्क्यू किया। खास बात यह है कि फैक्ट्री में एक ही गांव के 30 लोग सो रहे थे। 

12-15 मशीनें लगी हुई हैं

एक अज्ञात बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, ‘‘कम से कम इस इकाई में 12-15 मशीनें लगी हुई हैं। मुझे इसकी जानकारी नहीं है कि फैक्ट्री मालिक कौन है।’’ उन्होंने बताया कि उनके तीन रिश्तेदार इस फैक्ट्री में काम करते हैं। व्यक्ति ने कहा, ‘‘मेरे संबंधी मोहम्मद इमरान और इकरमुद्दीन फैक्ट्री के भीतर ही थे और मुझे इसकी जानकारी नहीं है कि अब वे कहां हैं।’’

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