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बड़ा खुलासा: भारत ने सौंपे थे 16 चीनी सैनिकों के शव...जानिए 15 जून की रात को क्या क्या हुआ था?

 पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में 15 जून को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प को लेकर कई तरह के खुलासे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि दोनों सेनाओं के बीच 15 जून को 1 बार नहीं बल्कि तीन बार झड़प हुई थी।

full story of india china army face off 15 june in galwan valley in ladakh KPP
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New Delhi, First Published Jun 22, 2020, 8:31 AM IST
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लद्दाख. पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में 15 जून को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प को लेकर कई तरह के खुलासे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि दोनों सेनाओं के बीच 15 जून को 1 बार नहीं बल्कि तीन बार झड़प हुई थी। इसके अलावा भारतीय सैनिकों ने अपने इलाके में बनी चीनी पोस्टों को भी उखाड़ फेंका था। इतना ही नहीं झड़प के बाद भारत ने चीनी सैनिकों के शव भी उन्हें सौंपे थे।

इंडिया टुडे ने गलवान घाटी में तैनात अफसरों से इस घटना को लेकर बात की है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 दिन पहले यानी 6 जून को दोनों देशों के बीच लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बात हुई थी। इसके बाद दोनों सेनाएं पीछे हटने को तैयार हुई थीं। दोनों देशों की आर्मी एलएसी के काफी करीब आ गई थीं।

चीन ने दोबारा बनाया था पोस्ट
गलवान नदी के किनारे चीन का एक पोस्ट भारतीय सीमा में था। बातचीत के दौरान चीन की सेना इसे हटाने को लेकर तैयार भी हो गई थी। बातचीत के बाद चीनी सेना ने इस पोस्ट को हटा भी लिया था। लेकिन बाद में इस पोस्ट को दोबारा बना लिया गया।

<p>वहीं, बटालियन के अन्य जवान इसे उखाड़ फेंकना चाहते थे। लेकिन कर्नल बाबू अपने स्वभाव के अनुरूप बातचीत से मामला सुलझाने के पक्ष में थे।&nbsp;</p>


35 जवानों के साथ पहुंचे थे कर्नल बाबू
15 जून की शाम को बिहार बटालियन के कमांडिंग अफसर कर्नल बी संतोष बाबू ने फैसला किया था कि वे इस पोस्ट के पास जाकर जानकारी लेंगे कि यह यहां कैसे बन गई। वहीं, बटालियन के अन्य जवान इसे उखाड़ फेंकना चाहते थे। लेकिन कर्नल बाबू अपने स्वभाव के अनुरूप बातचीत से मामला सुलझाने के पक्ष में थे। 15 जून की शाम को कर्नल बाबू 35 जवानों के साथ उस पोस्ट पर गए थे। यहां जब ये लोग पोस्ट पर पहुंचे तो, चीनी सैनिक बदले हुए नजर आ रहे थे। यहां वे सैनिक नहीं थे जो सामान्य तौर पर ड्यूटी पर होते हैं। भारतीय सेना को पता चला है कि यहां मई में ही दूसरे सैनिकों को भेजा गया है।

<p>&nbsp;वहीं, चीन के सैनिक पहले से इंतजार कर रहे थे। जैसे ही भारतीय सैनिक वहां पहुंचे, उनपर चीनी सैनिक पत्थर बरसाने लगे। एक पत्थर कर्नल बाबू के सिर पर लगा। वे गलवान नदी में गिर गए।&nbsp;</p>


धक्का देने के बाद शुरू हुई हिंसा
कर्नल बाबू जब पोस्ट पर बातचीत करने पहुंचे और इस पोस्ट के बार में पूछा तो एक जवान ने उन्हें धक्का दे दिया। इसके अलावा चीनी भाषा में अभद्र टिप्पणी भी की। इसके बाद भारतीय जवानों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। भारतीय जवान चीनियों पर टूट पड़े। 30 मिनट तक चली झड़प में दोनों ओर के लोग चोटिल हुए। लेकिन भारतीय जवानों ने पोस्ट को तोड़ दिया।

इस झड़प के बाद कर्नल बाबू ने सूझबूझ का परिचय देते हुए घायल सैनिकों को पोस्ट पर भेजा और पोस्ट से ज्यादा जवान भेजे जाएं। लेकिन कर्नल बाबू ने भारतीय जवानों को शांत रखा।

<p>15 जून की शाम को कर्नल बाबू 35 जवानों के साथ उस पोस्ट पर गए थे। यहां जब ये लोग पोस्ट पर पहुंचे तो, चीनी सैनिक बदले हुए नजर आ रहे थे। यहां वे सैनिक नहीं थे जो सामान्य तौर पर ड्यूटी पर होते हैं। भारतीय सेना को पता चला है कि यहां मई में ही दूसरे सैनिकों को भेजा गया है।</p>

तीन बार हुई झड़प 
भारत और चीन की सेना के बीच एक बार नहीं तीन बार हिंसक झड़प हुई थी। ये झड़पें करीब 5-6 घंटे तक चलीं। भारत की तुलना में चीन के सैनिक ज्यादा था। दूसरी झड़प में कर्नल बाबू को सिर में पत्थर लगा था। इसके बाद वे नदी में गिर गए। कर्नल बाबू के शहीद होने के बाद भारतीय सैनिक चीन पर टूट पड़े। लेकिन घाटी सकरी होने के चलते दोनों देशों के कई जवान नदी में गिर गए। इसके बाद यह पूरी झड़प 11 बजे शांत हुई। इसके बाद दोनों देशों ने अपने जवानों को खोजा। इस दौरान शवों की अदला बदली भी हुई। भारत ने चीन को 16 सैनिकों के शव सौंपे थे। इनमें 5 अफसर भी थे। इसी दौरान गलती से भारत के 10 जवान चीन के कब्जे में आ गए थे। 

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