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मिडिल क्लास फैमिली ने 5 महीने के बेटे की जिंदगी बचाने 1 इंजेक्शन के लिए क्राउड फंडिंग से जुटाए 16 करोड़ रुपए

गुजरात के महीसागर जिले के एक गांव में रहने वाले मध्यमवर्गीय दम्पती ने अपने 5 महीने के बेटे के इलाज के लिए क्राउड फंडिंग से 16 करोड़ रुपए जुटाकर हिम्मत और जिंदगी जीने के जज्बे को दिखाया है। बच्चे को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy) नामक दुर्लभ बीमारी है।
 

Gujarat Couple Raise 16 Crore For 1 Injection To Save 5 Month Old Son kpa
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New Delhi, First Published May 5, 2021, 1:35 PM IST
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महीसागर, गुजरात. दुनिया की सबसे दुर्लभ बीमारियों में एक स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy) से पीड़ित अपने 5 महीने के बेटे धैर्यराज सिंह की जान बचाने महीसागर जिले के कानेसर गांव के रहने वाले राजदीपसिंह राठौर ने क्राउड फंडिंग से 16 करोड़ रुपए जुटाकर हिम्मत और जिंदगी जीने के जज्बे को दिखाया है। बता दें कि इस बीमारी का इलाज न होने पर बच्चा 2 साल से अधिक जीवित नहीं रह पाता। इस बीमारी में लगने वाले एक इंजेक्शन की कीमत ही करीब 22 करोड़ रुपए है। हालांकि इस पर सीमा शुल्क लगभग 6.5 करोड़ रुपए आता है। इसे सरकार ने मानवीय आधार पर माफ कर दिया है।

जानिए पूरी कहानी...
एक स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक जेनेटिक बीमारी है। बच्चे को बुधवार को मुंबई के एक निजी अस्पताल में यह इंजेक्शन लगाया गया। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क स्टेम में तंत्रिका कोशिकाओं के नुकसान के कारण इंसान मांसपेशियों की गति को नियंत्रित नहीं कर पाता है। बच्चे के पिता ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी जिनाल्बा के साथ मिलकर मार्च में पैसा जुटाने अभियान शुरू किया था। सिर्फ 42 दिनों में वे 16 करोड़ रुपये जुटाने में सफल रहे। उन्हें गुजरात के अलावा देश-विदेश से मदद मिली। राजदीपसिंह राठौर ने सबका आभार जताया। 

स्विस फार्मा की दिग्गज कंपनी नोवार्टिस द्वारा निर्मित जीन थेरेपी इंजेक्शन की भारत में कीमत 16 करोड़ रुपये है। इस पर सीमा शुल्क लगभग 6.5 करोड़ रुपए लगता है। यह इंजेक्शन इस बीमार का एकमात्र इलाज है। इसे बाहर से ही मंगाना पड़ता है। इंजेक्शन कुछ दिन पहले अमेरिका से भारत पहुंचा। मंगलवार को बच्चे को मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुधवार को उसे इंजेक्शन दिया गया। बच्चे की बीमारी का पता उसके जन्म के महीनेभर बाद चला था, जब वो मुश्किल से अपने हाथ-पैर हिला पा रहा था।

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