स्वतंत्रता दिवस पर 'हर घर तिरंगा अभियान' सिर्फ देशभक्ति ही नहीं जगा रहा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रहा है। संस्कृति मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन ने बताया कि कैसे यह अभियान, खासकर महिलाओं के लिए, नौकरी का जरिया बन रहा है।

नेशनल न्यूज। स्वतंत्रता दिवस पर फिर से हर घर पर तिरंगा लहराएगा। बच्चों से लेकर बड़े तक राष्ट्रीय पर्व को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं। ऐसे में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत हर इलाके में झंडा वितरण किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं यह अभियान देश भर में लोगों को देश के प्रति सम्मान करने और एकजुट करने के साथ रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रहा है। खासकर महिलाओं के लिए इस अभियान ने नए अवसर प्रदान किए हैं। जी हां, संस्कृति मंत्रालय के सचिव गोविंद मोहन ने इस बारे में विस्तार से चर्चा की।

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आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में शुरू हुआ अभियान
गोविंद बताते हैं कि हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत अमृत महोत्सव के रूप में 2022 में हुई थी। पीएम मोदी की ओर से एक आंदोलन के रूप में ये अभियान जनता को साथ लेते हुए यह एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में उभरा था। पीएम मोदी ने हर भारतवासी से अपील की थी कि वह अपने घर पर तिरंगा लगाए। इसका प्राथमिक उद्देश्य देशभक्ति को बढ़ावा देना था। दो साल से अब तक ये अभियान उसी तरह जारी है। 

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इस जन आंदोलन ने महिलाओं को दिए रोजगार
गोविंन ने कहा जन आंदोलन के रूप में शुरू हुआ यह अभियान महज देशभक्ति को मजबूत करने तक ही नहीं सीमित रहा। इस अभियान ने महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी खोले हैं। अगर देखा जाए तो इसने महिलाओं के लिए एक उद्योग विकसित किया है। आज स्वयं सहायता समूह राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाले प्रमुख उत्पादक बन गए हैं। 

पहली बार तिरंगा वितरण बड़ी चुनौती
गोविंद ने बताया किपहली बार जब अभियान शुरू हुआ था तो तिरंगे की मांग की पूर्ति करना बड़ी चुनौती थी। केंद्र सरकार ने बड़े विक्रेताओं से 7.5 करोड़ झंडे खरीदे और उसे देश भर में बंटवाया। इस अभियान को और समर्थन देने के लिए पीएम ने भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया और महिला स्वयं सहायता समूहों को इससे जोड़ा। इससे उनके रोजगार के अवसर भी बढ़े। 

महिला स्वयंसेवी संगठनों ने संभाला तिंरगा निर्माण का काम 
अभियान के दूसरे वर्ष तक महिला स्वयं सहायता समूहों ने तिरंगे का प्रोडक्शन पूरी तरह से संभाल लिया था। इससे केंद्र सरकार की ओर से बांटे गए राष्ट्रीय ध्वज की मांग करीब 2.5 करोड़ ही रह गई थी। महिलाओं के लिए यह अभियान रोजगार के नए अवसर लेकर आया। 2024 में केंद्र की ओर से वितरित तिरंगे की मांग सिर्फ 20 लाख रह गई। इससे अब महिला स्वयं सहायता समूह तिरंगे का प्राथिमिक उत्पादक बन गया। हर साल करीब 25 करोड़ झंडे की जरूरत होती है। इस बदलाव ने इन समूहों को एक बड़ा उद्योग दे दिया। पीएम मोदी के हर घर तिरंगा अभियान ने न केवल जनभागीदारी सुनिश्चित की बल्कि महिलाओं को आर्थिक हालात सुधारने के अवसर भी प्रदान किए। 

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