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USA की नौसेना के साथ अभ्यास करेगी इंडियन एयर फोर्स, F-18 जैसे फाइटर प्लेन भी होंगे शामिल

अभ्यास दो दिनों तक तिरुवनंतपुरम के दक्षिण में, पश्चिमी समुद्र तट पर किया जाएगा। IAF के प्रवक्ता विंग कमांडर आशीष मोघे ने कहा कि दक्षिणी वायु कमान की जिम्मेदारी के क्षेत्र में अभ्यास से IAF सेना चार ऑपरेशनल कमांड के तहत ठिकानों से काम करेगी।

IAF Navy to engage with US Carrier Strike Group in the Indian Ocean pwa
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New Delhi, First Published Jun 22, 2021, 10:34 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय वायु सेना (IAF) और संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना 23 जून से हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन संबंधी अभ्यास में हिस्सा लेंगे। जिसका उद्देश्य समुद्री वायुशक्ति डोमेन को बढ़ाना है। संयुक्त परिचालन अभ्यास मित्र देशों के रक्षा बलों के साथ रणनीतिक पहुंच के एक भाग के रूप में किया जाएगा। अभ्यास रोनाल्ड रीगन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (सीएसजी) के साथ किया जाएगा क्योंकि यह वर्तमान में हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात है।

इंडियन एयरफोर्स जगुआर और सुखोई -30 MKI फाइटर जेट, AWACS, AEW&C और एयर-टू-एयर रिफ्यूलर एयरक्राफ्ट जैसे विमानों को तैनात करेगा, जबकि अमेरिकी नौसेना से F-18 और E-2C हॉकआई AEW&C जैसे फाइटर जेट्स को उतारने की उम्मीद है।

अभ्यास दो दिनों तक तिरुवनंतपुरम के दक्षिण में, पश्चिमी समुद्र तट पर किया जाएगा। IAF के प्रवक्ता विंग कमांडर आशीष मोघे ने कहा कि दक्षिणी वायु कमान की जिम्मेदारी के क्षेत्र में अभ्यास से IAF सेना चार ऑपरेशनल कमांड के तहत ठिकानों से काम करेगी। उन्होंने कहा, "आईएएफ को आईओआर में समुद्री अभियानों का व्यापक अनुभव है। वर्षों से, इसे अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में भागीदारी सहित देश के द्वीप क्षेत्रों से अभ्यास के संचालन से समेकित किया गया है।"

उन्होंने कहा कि यूएस कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ यह जुड़ाव एक  विदेशी मित्र शक्ति के साथ समुद्री क्षेत्र में संयुक्त संचालन करने का एक और अवसर प्रदान करता है। यह अभ्यास इंटरऑपरेबिलिटी के पहलुओं को बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय एकीकृत समुद्री खोज और बचाव कार्यों की बारीकियों और समुद्री वायुशक्ति डोमेन में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान सहित कई क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा। 

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