भारत की सबसे लेट ट्रेन: 42 महीने बाद अपने सही जगह पहुंची रेल, जाने पूरा मामला
नवंबर 2014 में विशाखापत्तनम से रवाना हुई एक ट्रेन 3.5 साल बाद उत्तर प्रदेश के बस्ती स्टेशन पहुँची, जो भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे लंबी देरी है। ट्रेन में 14 लाख रुपये से ज्यादा कीमत के उर्वरक थे, जो देरी के कारण बेकार हो गए।
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भारतीय रेलवे की एक ट्रेन ने देश के इतिहास में सबसे लंबी देरी का रिकॉर्ड बनाया। नवंबर 2014 में विशाखापत्तनम से रवाना हुई यह ट्रेन उत्तर प्रदेश के बस्ती स्टेशन पहुँचने में पूरे 3.5 साल लगा दिए। आम तौर पर 1,400 किलोमीटर की इस दूरी को तय करने में 42 घंटे 13 मिनट का समय लगता है।
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ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन में 14 लाख रुपये से ज्यादा कीमत के 1,361 बोरी उर्वरक थे, जिसे व्यापारी रामचंद्र गुप्ता ने डिलीवरी के लिए बुक कराया था। हालांकि, नवंबर 2014 में ट्रेन निर्धारित समय पर नहीं पहुंची। परेशान गुप्ता ने रेलवे अधिकारियों से संपर्क किया और कई बार शिकायत दर्ज कराई।
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लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ट्रेन बिना किसी सुराग के गायब हो गई। कई सालों की खोज और जांच के बाद, आखिरकार साढ़े तीन साल बाद जुलाई 2018 में ट्रेन बस्ती स्टेशन पहुंची। तब तक उर्वरक बेकार हो चुका था। जांच के बावजूद, ट्रेन के इतनी देरी से पहुंचने या इतने समय तक गायब रहने का कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल सका।
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यह घटना भारतीय रेलवे के इतिहास में सबसे चौंकाने वाली और रहस्यमय देरी में से एक है। यह रेलवे प्रणाली में मौजूद चुनौतियों और भविष्य में इस तरह की गंभीर देरी से बचने के लिए मालगाड़ियों की बेहतर निगरानी और प्रबंधन की आवश्यकता को उजागर करती है।
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