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उधर ISRO ने रचा इतिहास, इधर कर-नाटक का नहीं हो रहा द END

 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपना दूसरा चंद्रयान मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक की सियासत में अभी भी उबाल मचा हुआ है।

ISRO makes history on other hand Karnataka assembly number game on
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Karnataka, First Published Jul 22, 2019, 6:05 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपना दूसरा चंद्रयान मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई दोपहर 2.43 मिनट पर सबसे ताकतवर रॉकेट GSLV-MK-3 से लॉन्च कर दिया गया। वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक की सियासत में अभी भी उबाल मचा हुआ है। हालांकि  कर्नाटक विधानसभा में चल रहे घमासान पर विराम लगने के संकेत स्पीकर रमेश कुमार ने दे दिए हैं। उन्होंने कहा है, कि विश्वास मत का फैसला आज ही लिया जाएगा। साथ ही कहा- हर सदस्य सिर्फ 10 मिनट बोलेगा। मुझे बार- बार यह बात दोहरानी न पड़े। इससे पहले कार्यवाही शुरू होने से पहले स्पीकर ने 15 बागी विधायकों को आयोग्यता के मुद्दे पर नोटिस जारी किया है। स्पीकर ने विधायकों को 23 जुलाई को 11 बजे तक अपने ऑफिस में बुलाया है। खबर है कि 7 बजे के आसपास कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात कर इस्तीफा सौंप सकते हैं। लेकिन सीएमओ की तरफ से जारी बयान में साफ कर दिया  गया कि मुख्यमंत्री का राज्यपाल से 7 बजे मिलने का कोई इरादा नहीं है। 

क्या बोले स्पीकर 

स्पीकर रमेश कुमार का कहना है कि वो आज एक आदेश पारित करेंगे। उन्होंने माना कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश समझने में देरी हुई। सभी विधानसभा के मेंबर्स से उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने को कहा है। साथ ही कहा विधानसभा में समय बर्बाद करने से स्पीकर और विधायकों की छवि धूमिल होती है। कुमारस्वामी के विश्वास मत प्रस्ताव पर गुरुवार और शुक्रवार को चर्चा हो चुकी है। 

कर्नाटक के नाटक में अबतक क्या

दरअसल कर्नाटक में सियासी उथल पुथल की शुरूआत उस समय हुई, जब कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन के 16 विधायकों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया। जिससे स्वामी सरकार अल्पमत में आ गई। इस्तीफा देने वाले विधायकों में कांग्रेस के 13 और जेडीएस के 3 विधायक शामिल हैं। 


18 जुलाई: विधानसभा में मुख्यमंत्री स्वामी ने रखा विश्वासमत प्रस्ताव
विधानसभा की कार्यवाही के पहले दिन गुरूवार 18 जुलाई को सदन की शुरुआत में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने विश्वासमत प्रस्ताव रखा था। जिसके बाद सदन में बहसों का दौर शुरू हुआ। कार्यवाही के पहले दिन खूब हंगामा देखने को मिला। बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों के बीच बहस भी देखने को मिली। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने माना था कि सरकार पर संकट बरकरार है। उस दिन कर्नाटक में विश्वास मत प्रस्ताव को लेकर बहस के बाद स्पीकर ने सदन की कार्रवाई को शुक्रवार के लिए स्थगित कर दिया। जिसके बाद नाराज बीजेपी विधायकों ने विधानसभा में रात भर धरना दिया। सभी विधायकों ने रात के डिनर से लेकर सुबह का ब्रेकफास्ट सदन में किया। 

19 जुलाई: राज्यपाल के निर्देशों को स्पीकर ने किया नजरअंदाज

शुक्रवार को जब दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो सभी को उम्मीद थी, कि सरकार को लेकर फैसला हो जाएगा। लेकिन उस दिन भी विश्वासमत पर वोटिंग नहीं हो सकी। राज्यपाल  वजुभाई वाला ने दो बार स्पीकर को समय सीमा तय कर बहुमत परीक्षण कराने के निर्देश दिए लेकिन स्पीकर ने अनदेखा कर दिया। राज्यपाल ने सीएम को लिखे पत्र में साफ कहा था कि आपकी सरकार बहुमत खो चुकी। आप बेवजह फ्लोर टेस्ट टालने के लिए लंबी बहस को अंजाम दे रहे । राज्यपाल ने पहले दोपहर डेढ़ बजे की समय सीमा तय करके परीक्षण कराने के निर्देश दिए थे, वहीं उसके बाद दोबारा तल्ख लहजे में पत्र लिखते हुए बहुमत कराने की लिए 6 बजे की समय सीमा तय की। लेकिन स्पीकर ने उन्हें नजरंदाज कर सदन को 21 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया। जिसके बाद आज तीसरे दिन यानि 22 जुलाई को सदन की कार्यवाही शुरू हुई।    

22 जुलाई: विधानसभा की कार्यवाही जारी, स्पीकर ने परीक्षण के दिए संकेत

वहीं कर्नाटक में विधानसभा में तीसरे दिन की कार्यवाही जारी है। बसपा के एकलौते विधायक एन.महेश आज भी विधानसभा नहीं पहुंचे। रविवार को बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें स्वामी सरकार के पक्ष में वोटिंग करने के निर्देश दिए थे।  जानकारी है, कि सरकार के पास अब कोई और विकल्प नहीं बचा है। अब यह तय हो गया है, विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है। 13 कांग्रेस और 3 जेडीएस के विधायकों के इस्तीफे के साथ ही इस गठबंधन की सरकार का हल विश्वास मत के साथ हो सकता है। वहीं अब अगर सोमवार को विश्वासमत से फैसला होता है, तो बीजेपी अपने संख्याबल के हिसाब से सरकार बनाने में सफल साबित हो सकती है। 


 

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