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14 साल के जिस आरोपी की तलाश में थी पुलिस, उस पीटर फ्रेडरिक का नाम टूलकिट में मिला, दिया गया था बड़ा काम

टूल किट केस में नए नाम का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के डीसीपी मनीषी चंद्रा ने बताया कि टूल किट में लिखे व्यक्तियों में से एक का नाम पीटर फ्रेडरिक है। पुलिस के मुताबिक, पीटर फ्रेडरिक खालिस्तान का समर्थक था और 2006 से खुफिया एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं। टूल किट में पीटर फ्रेडरिक का नाम रिसोर्स पर्सन के रूप में लिखा हुआ था।

Khalistani supporter Peter Frederick is also named in the tool kit case kpn
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New Delhi, First Published Feb 16, 2021, 7:26 AM IST
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नई दिल्ली. टूल किट केस में नए नाम का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के डीसीपी मनीषी चंद्रा ने बताया कि टूल किट में लिखे व्यक्तियों में से एक का नाम पीटर फ्रेडरिक है। पुलिस के मुताबिक, पीटर फ्रेडरिक खालिस्तान का समर्थक था और 2006 से खुफिया एजेंसियां उसकी तलाश कर रही थीं। टूल किट में पीटर फ्रेडरिक का नाम रिसोर्स पर्सन के रूप में लिखा हुआ था।

पुलिस के मुताबिक, पीटर एक अन्य जांच का हिस्सा था, जिसपर पुलिस लगभग एक महीने से जांच कर रही थी। ये शख्स भारत के खिलाफ इन्फो वार चला रहा था। पुलिस ने बताया कि 80 के दशक में अशांति के दौरान भजन सिंह भिंडर उर्फ इकबाल चौधरी नाम का एक खालिस्तानी सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, पीटर इसी के साथ काम करता था। पुलिस के मुताबिक, पीटर अभी भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा वार चला रहा है। 

पीटर का नाम एक और संगठन सिख इनफॉर्मेशन सेंटर से भी जुड़ा है। ये संगठन भी खालिस्तानी एजेंडा के लिए काम कर रहा है। पीटर फ्रेडरिक का लिंक पाकिस्तान तक जाता है। भजन सिंह भिंडर का एक दूसरा सहयोगी लाल सिंह आईएसआई के सहयोग से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देता था।

टूल किट मामले में इससे पहले चार लोगों की भूमिका सामने आ रही थी। ये लोग हैं दिशा रवि, पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के फाउंडर एमओ धालीवाल , निकिता जैकब और शांतनु।

1- दिशा रवि बेंगलुरु के एक निजी कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक हैं। वह फ्राइडे फॉर फ्यूचर इंडिया नाम के एक समूह के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। दिल्ली की एक अदालत ने क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि को 5 दिन की दिल्ली पुलिस की विशेष सेल की हिरासत में भेजा।

2- एमओ धालीवाल डिजिटल ब्रांडिंग क्रिएटिव एजेंसी स्कायरॉकेट में डायरेक्टर है। धालीवाल ने सोशल मीडिया पर खुद यह बात मानी थी कि वह खालिस्तानी है।

3- निकिता मुंबई में रहने वाली वकील हैं। वे सोशल जस्टिस और क्लाइमेट एक्टिविस्ट हैं।आरोप है कि निकिता भी इस मीटिंग में शामिल हुई थीं। निकिता ने इस टूलकिट को एडिट किया था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 4 दिन पहले एक स्पेशल टीम निकिता के घर गई थी। वहां से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त कर उनकी जांच की गई। इसके बाद जब पुलिस दोबारा पूछताछ के लिए निकिता के घर पहुंची, तो वह फरार हो चुकी थी।

4- पुलिस ने टूलकिट मामले में शांतनु के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया है। शांतनु दिशा और निकिता का साथी है। आरोप है कि शांतनु ने टूलकिट बनाया था। इसके लिए उसने ईमेल अकाउंट बनाया था। बाद में उसने इसे निकिता, दिशा और अन्य लोगों के साथ शेयर किया। हालांकि, अभी शांतनु के बारे में और जानकारी सामने नहीं आई है।

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