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रक्षा मंत्रालय ने राहुल गांधी के दावों को बताया गलत, कहा- फिंगर 4 तक नहीं, फिंगर 8 में है LAC

रक्षा मंत्रालय ने यह साफ कर दिया कि एलएसी पर भारतीय सीमा क्षेत्र फिंगर 4 तक नहीं, बल्कि फिंगर 8 तक है। रक्षा मंत्रालय ने पैंगोंग त्सो झील पर पीछे हट रहीं भारत और चीन की सेनाओं को लेकर फैलाई जा रही गलत और भ्रामक जानकारी पर संज्ञान लेते हुए यह जानकारी दी। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोनों सदनों में इस बारे में स्पष्ट जानकारी सबके सामने रखी है। 

LAC as per the Indian perception is at Finger 8 not at Finger 4 says Defence Ministry KPP
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New Delhi, First Published Feb 12, 2021, 4:38 PM IST
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नई दिल्ली. रक्षा मंत्रालय ने यह साफ कर दिया कि एलएसी पर भारतीय सीमा क्षेत्र फिंगर 4 तक नहीं, बल्कि फिंगर 8 तक है। रक्षा मंत्रालय ने पैंगोंग त्सो झील पर पीछे हट रहीं भारत और चीन की सेनाओं को लेकर फैलाई जा रही गलत और भ्रामक जानकारी पर संज्ञान लेते हुए यह जानकारी दी। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दोनों सदनों में इस बारे में स्पष्ट जानकारी सबके सामने रखी है। 

दरअसल, रक्षा मंत्री ने गुरुवार को भारत और चीन विवाद को लेकर दोनों सदनों में अपनी बात रखी थी। इसे लेकर राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि भारत ने अपनी जमीन चीन को सौंप दी है।

फिंगर 8 तक भारतीय क्षेत्र, यह दावा बिल्कुल गलत
रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि ऐसा दावा किया जा रहा है कि भारतीय क्षेत्र फिंगर 4 तक है, वह गलत है। भारत के क्षेत्र को भारत के नक्शे द्वारा दर्शाया गया है और इसमें 1962 के बाद से चीन द्वारा अवैध कब्जा किया गया 43,000 वर्ग किमी क्षेत्र भी शामिल है।

फिंगर 8 तक गश्त करेगी भारतीय सेना
मंत्रालय ने आगे कहा, भारतीय धारणा के मुताबिक, यहां तक ​​कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) फिंगर 4 तक नहीं, बल्कि फिंगर 8 में है। इसी वजह से भारत ने चीन के सामने यह साफ कर दिया है कि हमारी सेना फिंगर 8 तक गश्त करती रहेगी। 

वहीं, दोनों ओर स्थाई पोस्ट की बात करें तो पैंगोंग झील के उत्तर किनारे पर भारत की आखिरी पोस्ट फिंगर 3 के पास धन सिंह थापा पोस्ट है, जबकि चीन की तरफ यह फिंगर 8 के पूर्वी तरफ है। वर्तमान समझौता दोनों पक्षों द्वारा आगे की तैनाती को रोकने और इन स्थायी पोस्टों पर तैनाती का अधिकार देता है।

भारत ने नहीं सौंपा कोई क्षेत्र
भारत ने इस समझौते के तहत अपना कोई भी क्षेत्र नहीं छोड़ा है। साथ ही भारत ने एलएसी का पालन करने और इसकी यथास्थिति में किसी भी एकतरफा परिवर्तन का भी विरोध किया है। 

 रक्षा मंत्री के बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देप्सांग में अभी भी विवाद है। पैंगोंग झील से दोनों सेनाएं हटने के 48 घंटे बाद इन क्षेत्रों में विवाद सुलझाने के लिए बात की जाएगी। 

सरकार को सेना पर पूरा भरोसा
पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में हमारे राष्ट्रीय हित और क्षेत्र की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, क्योंकि सरकार ने सुरक्षाबलों की क्षमताओं पर पूरा भरोसा किया है। जो लोग जवानों के बलिदान के चलते मिली उपलब्धियों पर संदेह कर रहे हैं, वे वास्तव में हमारे जवानों का अपमान कर रहे हैं। 

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