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महाराष्ट्र: परिवार, पार्टी को बचाने की आखिरी कोशिश, सुप्रिया सुले ने भाई अजित पवार से की भावुक अपील

एसनीपी और पवार परिवार को टूट से बचाने के लिए पवार की बेटी और पार्टी की दिग्गज नेता सुप्रिया सुले ने भी पार्टी और परिवार बचाने के लिए पहली बार एक भावुक अपील की है। सुप्रिया सुले ने कहा, "परिवार की अब तक की यात्रा को महाराष्ट्र जानता है। सत्ता के खेल के लिए अपने परिवार को विभाजित न करें।

Maharashtra: Last attempt to save family and party, Supriya Sule makes emotional appeal to brother Ajit Pawar
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Mumbai, First Published Nov 24, 2019, 9:47 AM IST
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मुंबई. तमाम दिग्गज नेता, मराठा क्षत्रप के करीबी एसनीपी और पवार परिवार को टूट से बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। शरद पवार की बेटी और पार्टी की दिग्गज नेता सुप्रिया सुले ने भी पार्टी और परिवार बचाने के लिए पहली बार एक भावुक अपील की है। शनिवार सुबह अजित पवार ने यूटर्न लिया और पार्टी के खिलाफ बगावत कर दी। उन्होंने कुछ विधायकों को लेकर राजभवन में बीजेपी संग सरकार बना ली। देवेंद्र फडणवीस ने सीएम और अजित ने डिप्टी सीएम के पद की शपथ ली। शनिवार को ये सबकुछ इतना तेज हुआ कि किसी को भनक तक नहीं लगी। अब एनसीपी और पवार फैमिली के सामने टूट-फूट का बड़ा संकट मंडरा रहा है। इस बीच तमाम नेता अजित पवार के साथ सुलह की कोशिश में भी जुटे हुए हैं। चचेरी बहन सुप्रिया सुले ने पार्टी में वापस आने की भावुक अपील करते हुए कि कहा, "अजित कुछ भी करें, उपमुख्यमंत्री पद से तत्काल इस्तीफा दें। उनकी शिकायतों पर बात होगी।" बताते चलें कि शिवसेना के साथ पार्टी के गठबंधन को लेकर अजित असहमत हैं।

पहली बार सुप्रिया ने वापसी को कहा

एक मराठी टीवी चैनल के मुताबिक सुप्रिया सुले ने कहा, "परिवार की अब तक की यात्रा को महाराष्ट्र जानता है। सत्ता के खेल के लिए अपने परिवार को विभाजित न करें। हम चर्चा करेंगे कि आप क्या चाहते हैं और इस पर समझौता भी करेंगे।" सुप्रिया ने अजित से पहली बार इस्तीफा देने और वापस आने का आग्रह किया।

अजित पवार को मनाने पहुंचे नेता

हालांकि, सुप्रिया की अपील पर अभी तक अजित पवार की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आई है। एनसीपी के तमाम कार्यकर्ता और पदाधिकारी अजित के अप्रत्याशित चौंकाने वाले कदम से भ्रमित हैं। लोकल रिपोर्ट्स के मुताबिक डिप्टी सीएम के पद की शपथ लेने के बाद सुनील तटकरे, दिलीप वलसे पाटिल और हसन मुश्रीफ जैसे एनसीपी नेता अजित को समझाने श्रीनिवास पवार के घर भी पहुंचे। अजित मुंबई में सपरिवार अपने भाई श्रीनिवास के ही घर रुके हैं।

कहा यह भी जा रहा है कि अजित सुलह को बिल्कुल तैयार नहीं हैं। हालांकि अजित ने सुलह कराने आए नेताओं के जरिए एनसीपी चीफ को संदेश भिजवाया, "अगर वो (शरद पवार) पार्टी को विभाजित होने से बचाना चाहते हैं तो उन्हें बीजेपी के साथ आ जाना चाहिए।"

आखिर किस बात पर नाराज हैं अजित

अजित ने डिप्टी सीएम के पद की शपथ लेने के बाद शनिवार को कहा भी था कि पिछले एक महीने से तीन दलों एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना) में बात हो रही है, मगर कुछ तय नहीं हो पा रहा है। रोज रोज बेमतलब की मांगे हो रही हैं। अजित के मुताबिक जब अभी से ये हाल है तो आगे चलकर ऐसी सरकार का भविष्य अनिश्चित है। अजित ने कहा, "किसान समस्या से गुजर रहे हैं और राज्य को एक स्थिर सरकार की जरूरत है। किसानों की भलाई और स्थिर सरकार के लिए ही उन्होंने बीजेपी के साथ आने का फैसला किया है।"

वैसे अंदर के सूत्रों की मानें तो अजित पवार शिवसेना को पांच साल तक के लिए मुख्यमंत्री पद देने की बात पर बिल्कुल राजी नहीं हैं। अजित के मुताबिक अगर एनसीपी के विधायकों की संख्या शिवसेना के बराबर है तो पांच साल तक के लिए उनका मुख्यमंत्री क्यों हो। अजित के इस तर्क से पार्टी के तमाम विधायक भी सहमत बताए जा रहे हैं।

अजित पवार के पक्ष में 20 से 24 विधायक हो सकते हैं। बीजेपी के 105 विधायक हैं। जबकि समर्थन देने वाले निर्दलीय विधायकों को जोड़ लें तो बीजेपी की संख्या करीब 119  तक है। अजित के 20 से 24 विधायक आने पर, देवेंद्र फडणवीस सदन में बहुमत साबित करने में कामयाब हो सकते हैं।

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