दिल्ली की एक अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक आश्रयगृह में कई लड़कियों के यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में ब्रजेश ठाकुर को मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 

नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में एक आश्रयगृह में कई लड़कियों के यौन शोषण और शारीरिक उत्पीड़न के मामले में ब्रजेश ठाकुर को मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने ठाकुर को उसके शेष जीवन के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

अदालत ने ठाकुर को 20 जनवरी को पॉक्सो कानून के तहत बलात्कार तथा सामूहिक बलात्कार का दोषी ठहराया था। 

Scroll to load tweet…

बच्चों के साथ क्रूरता का दोषी
अपने फैसले में ठाकुर को आपराधिक साजिश, घातक हथियारों से नुकसान पहुंचाना, पॉक्सो कानून और बच्चे के साथ क्रूरता का दोषी पाया था। अदालत ने हालांकि, विक्की नाम के आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। महिला आरोपियों में से एक मुजफ्फरपुर की बाल संरक्षण इकाई की पूर्व सहायक निदेशक, रोजी रानी को पॉक्सो कानून के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया।

ठाकुर की तरफ से पेश हुए वकील पी के दुबे और निशांक मट्टू ने संवाददाताओं से कहा था कि वे इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगे। दिलीप के वकील वकील ज्ञानेंद्र मिश्रा ने कहा था कि आरोपियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं है और वह फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देंगे।

आश्रयगृह में यौन उत्पीड़न 
अदालत ने सीबीआई की तरफ से पेश किए 69 गवाहों के बयान दर्ज किए थे। सीबीआई का पक्ष लोक अभियोजक अमित जिंदल ने रखा। इसने 44 लड़कियों के बयान दर्ज किए जिनका आश्रयगृह में यौन उत्पीड़न किया गया और शारीरिक हमला किया गया। इनमें से करीब 13 मानसिक रूप से कमजोर थीं।