नई दिल्ली.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 17 सितंबर को जन्मदिन है। मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वाडनगर में हुआ था। नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में देश के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसके बाद से वे अब तक 59 विदेश दौरे कर चुके हैं। इन दौरों पर कई बार उन्होंने एक से ज्यादा देशों की भी यात्रा की। पीएम मोदी मई 2014 से नवंबर 2019 तक 104 देशों की यात्राएं कर चुके हैं। हालांकि, पीएम मोदी पिछले 10 महीनों से किसी विदेश दौरे पर नहीं गए। सबसे ज्यादा विदेश दौरों के मामले में वे अभी इंदिरा गांधी से पीछे हैं। इंदिरा गांधी ने 16 साल में 113 विदेश यात्राएं की थीं।
 

प्रधानमंत्री       कार्यकाल विदेश यात्राएं
इंदिरा गांधी   1966-77, 80-84 113
नरेंद्र मोदी 2014 से अब तक 104*
मनमोहन सिंह 2004-14 93
जवाहर लाल नेहरू 1947-1964 68
अटल बिहारी वाजपेयी 1998-2004   48

 
पीएम मोदी ने पांच बार की रूस और अमेरिका की यात्रा

देश     यात्राएं 
अमेरिका 6
रूस 5
जापान 4
चीन 4


मोदी ने 2015 में सबसे ज्यादा यात्राएं कीं

साल यात्राएं
2014   9
2015   26
2016   18
2017   14
2018   23
2019   11


दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद कर चुके हैं इन देशों का दौरा
मोदी ने 30 मई को 2019 को दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद से वे अब तक 10 विदेश दौरों में 13 देशों की यात्रा कर चुके हैं। मोदी नवंबर 2019 में आखिरी दौरे पर ब्राजील गए थे। इससे पहले पीएम बनने के तुरंत बाद मालदीव और श्रीलंका दौरा किया था। श्रीलंका में बम धमाकों के बाद मोदी वहां जाने वाले पहले विदेशी नेता थे। इसके अलावा मोदी इस साल जापान, भूटान, फ्रांस, यूएई, रूस, अमेरिका, थाईलैंड, ब्राजील की यात्रा भी कर चुके हैं।

मोदी के विदेश दौरों से भारत को क्या मिला?
पीएम मोदी इंदिरा गांधी के बाद सबसे ज्यादा विदेश दौरे करने वाले प्रधानमंत्री हैं। ऐसे में उनके विरोधी और समर्थक दोनों ही ये सवाल उठाते हैं कि उनके विदेश दौरों से भारत को क्या मिला? इस सवाल के जवाब में भाजपा समर्थकों का कहना है कि भारत का वैश्विक स्तर पर कद ऊंचा हुआ है। वैश्विक कूटनीतिक स्तर पर भी भारत आगे बढ़ा है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि बीते 6 साल में मोदी के दौरों का भारत पर क्या असर पड़ा है? 

1- पिछली सरकार की तुलना में 50% अधिक बढ़ा एफडीआई
पीएम मोदी के पहले 5 सालों की बात करें तो फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) के तौर पर 193 अरब डॉलर आया है। यह यूपीए यानी मनमोहन सिंह की सरकार के आखिरी 5 साल की तुलना में 50% से भी अधिक है। 

2- एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ाने में मदद मिली
पीएम मोदी खाड़ी देशों से बेहतर रिश्ते बनाने में कामयाब हुए हैं। यही वजह है कि भारत ऊर्चा के स्तर को सुरक्षित करने में कामयाब रहा है। मोदी की सरकार में ही भारत ने अमेरिका से कच्चा तेल, एलपीजी कार्गो खरीदना शुरू किया। इसके अलावा खाड़ी देशों और रूस से भी कई समझौते हुए। दुनिया की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी अरामको भारत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी में निवेश के लिए तैयार हुई। यूएई भी भारत में ऑयल रिजर्व बनाने में मदद करेगा। 

3- दुनिया में बढ़ी भारत की साख
हाल ही में पाकिस्तान और चीन से चल रहे विवाद के बीच जिस तरह से भारत को दुनिया भर से समर्थन मिला है, वह कहीं ना कहीं मोदी की विदेश नीति के चलते ही संभव हो पाया है। आज चीन से विवाद के बीच अमेरिका, इजयारल, रूस, फ्रांस भारत को हथियार दे रहा है। इसके अलावा भारत पाकिस्तान और चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डालने में भी सफल रहा है।