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निर्भया केस में दोषी अक्षय की दलील, प्रदूषण से जिंदगी कम हो रही, फिर हमें क्यों दी जा रही फांसी

माना जा रहा है कि निर्भया केस में चारों दोषियों को जल्द ही फांसी की सजा हो सकती है। लेकिन इन खबरों के बीच ही एक दोषी अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। याचिका में दिल्ली प्रदूषण का जिक्र किया गया।

Nirbhaya case convicts Akshay Kumar filed review petition before the Supreme court
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New Delhi, First Published Dec 10, 2019, 8:04 PM IST
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नई दिल्ली. माना जा रहा है कि निर्भया केस में चारों दोषियों को जल्द ही फांसी की सजा हो सकती है। लेकिन इन खबरों के बीच ही एक दोषी अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की। याचिका में दिल्ली प्रदूषण का जिक्र किया गया। इसमें कहा गया है कि दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण की वजह से वैसे ही लोगों की उम्र कम हो रही है। हाल ही में केंद्र सरकार ने भी पानी और हवा में जहर घुलने की पुष्टि की है। ऐसे में हमें क्यों फांसी दी जा रही है।

दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से 6 लोगों ने बर्बरता पूर्वक सामूहिक बलात्कार किया था और उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया की 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर में माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में मौत हो गई थी। 

तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका हो चुकी खारिज
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 5 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। एक नाबालिग था, जो अभी सुधार गृह में है। जबकि एक दोषी ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी। तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका पहले ही खारिज कर चुका है। अब एक बचे हुए दोषी अक्षय की ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई है। 

अक्षय की याचिका में वेद पुराण से लेकर गांधी की बातों तक का जिक्र

- याचिका में कहा- दिल्ली-एनसीआर गैस चैंबर बन गया है। यहां वायु की गुणवत्ता बेहद खराब है। केंद्र सरकार ने भी इसकी पुष्टि की है। जिंदगी वैसे ही कम हो रही है। फिर मौत की सजा क्यों?
- वेद, पुराणों और उपनिषदों का जिक्र करते हुए अक्षय ने पुनर्विचार याचिका में दलील दी है कि युगों के साथ लोगों की उम्र घट रही है। यह एक कड़वी सच्चाई है कि आजकल के खराब हालात में इंसान एक लाश से ज्यादा कुछ नहीं।

-  याचिका में गांधी जी का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के बारे में भी सोचें। साथ ही कहा गया है कि सजा-ए-मौत का मतलब न्याय के नाम पर एक व्यक्ति को साजिश के तहत मार डालना।

- इसमें कहा गया है कि सजा केवल अपराधी को मारती है, अपराध को नहीं। सरकार को अपराध से घृणा करनी चाहिए, अपराधियों से नहीं। इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि भारत में फांसी की सजा खत्म की जानी चाहिए।

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