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2651 दिन बाद निर्भया को न्याय, पोस्टमार्टम के बाद दरिंदों का शव परिजनों को सौंपा गया

आखिरकार 2655 दिन के इंतजार के बाद देश की बेटी निर्भया को न्याय मिल गया। निर्भया के दोषियों को शुक्रवार सुबह 5.30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। पवन जल्लाद लीवर खींचकर चारों दोषियों को एक एक कर फांसी दी। यह पहला मौका है जब तिहाड़ में एक साथ चार दोषियों को फांसी दी गई।

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New Delhi, First Published Mar 19, 2020, 11:19 PM IST
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नई दिल्ली. आखिरकार 2651 दिन के इंतजार के बाद देश की बेटी निर्भया को न्याय मिल गया। निर्भया के दोषियों को शुक्रवार सुबह 5.30 बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। पवन जल्लाद लीवर खींचकर चारों दोषियों को एक एक कर फांसी दी। यह पहला मौका है जब तिहाड़ में एक साथ चार दोषियों को फांसी दी गई। दुष्कर्म के मामले में इससे पहले 2004 में कोलकाता के अलीपुर जेल में धनंजय चटर्जी को फांसी दी गई थी। 

इससे पहले निर्भया के दोषियों ने फांसी से बचने के लिए गुरुवार की सुबह से लेकर फांसी से 2 घंटे पहले यानी 3.30 बजे तक कानूनी दांव पेंच चले, लेकिन उनकी कोई चाल सफल नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट ने रात 2.30 बजे दोषी पवन की याचिका पर सुनवाई की। इसमें दोषी ने दावा किया था कि घटना के वक्त वह नाबालिग था। कोर्ट ने इस तथ्य को आधारहीन बताते हुए याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद फांसी का रास्ता साफ हो गया था। 

DDU हॉस्पिटल में किया गया पोस्टमार्टम

निर्भया के चारों दोषियों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए दीन दयाल उपाध्याय हॉस्पिटल ले जाया गया था। चारों शवों को अस्पताल ले जाने के लिए दो एंबुलेंस का इस्तेमाल किया गया। जहां डॉ. बीएन मिश्रा की अगुवाई में पांच डॉक्टरों का मेडिकल पैनल ने शवों का पोस्टमार्टम किया। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है। दोपहर एक बजे के आसपास चारों शवों का पोस्टमार्टम खत्म हो सका, जिसके बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। 

ऐसे हुई फांसी की प्रक्रिया

4 बजे सभी दोषियों को जगाया गया। उनसे नहाने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें काले कपड़े पहनाए गए। उन्हें चाय भी दी गई। हालांकि, विनय ने इससे पहले ही रोना शुरू कर दिया। उसने काले कपड़े भी नहीं पहने। डॉक्टरों ने चारों दोषियों का मेडिकल किया। इसके बाद चारों दोषियों को फांसी घर लाया गया। यहां चारों को फांसी दी गई। यहां फांसी पर दोषियों को आधे घंटे तक लटकाया गया। इसके बाद डॉक्टर ने सभी को मृत घोषित किया। तिहाड़ जेल से चारों शवों को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल लाया गया। यहां पोस्टमार्टम किया जाएगा। इसके बाद शवों को परिवार को सौंप दिया जाएगा।

हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
इससे पहले डेथ वारंट पर रोक लगाने के लिए दोषियों के वकील एपी सिंह दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे थे। यहां हाईकोर्ट ने दोषियों की याचिका खारिज करते हुए अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, मुवक्किल का ऊपर वाले से मिलने का वक्त आ गया। इसलिए अब आप ज्यादा वक्त बर्बाद ना करें। इसके बाद दोषियों के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की।

दिन भर चला कानूनी दांव पेच का खेल
- सबसे पहले दोषी पवन गुप्ता की क्यूरेटिव याचिका दायर की, इसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी। पवन ने दावा किया था कि वह जुर्म के वक्त नाबालिग था।
- इसके बाद पवन और अक्षय ने राष्ट्रपति के पास दूसरी दया याचिका दायर की। इसपर विचार करने से राष्ट्रपति ने मना कर दिया। 
- सुप्रीम कोर्ट में एक अन्य दोषी मुकेश पहुंचा। मुकेश ने अपराध में खुद की भूमिका नहीं बताते हुए रिकॉर्ड की दोबारा जांच की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
- अक्षय ने भी याचिका दाखिल की। राष्ट्रपति की तरफ से दया याचिका ठुकराए जाने को चुनौती दी। कहा- प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। इसे भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। 
- दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग की। लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया।
- पटियाला कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ रात 10 बजे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दो घंटे की दलीलों के बाद हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
- इसके बाद दोषी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। यहां दोषी पवन की ओर से याचिका लगाई गई, इसमें दावा किया गया कि घटना के वक्त वह नाबालिग था। हालांकि, कोर्ट ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया गया।  

क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट में?

- सुप्रीम कोर्ट में पवन गुप्ता की याचिका पर 2.30 बजे सुनवाई शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच ने इस पर सुनवाई की। इसमें दोषी पवन ने राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के फैसले को चुनोती दी थी। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।

- दोषी के वकील एपी सिंह ने कहा, पवन घटना के वक्त नाबालिग था।  

- सुप्रीम कोर्ट- जो पहले ही तय हो चुका है, उसे दोबारा नहीं दोहराया जा सकता। 

- जस्टिस भूषण ने कहा, ये दस्तावेज आप ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले भी रख चुके हैं। क्या आप इसी आधार पर फैसले को चुनौती दे रहे हैं। 

- जस्टिस ने कहा, नाबालिग होने का दावा कर आप राष्ट्रपति के दया याचिका को खारिज करने के फैसले को चुनौती नहीं दे सकते। 

- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के सामने जानकारी रखी कि इस आधार पर ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट में याचिकाएं लगाई जा चुकी हैं। 19 दिसंबर को हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद पवन ने इसी आधार पर क्यूरेटिव और दया याचिका भी लगाई। इस पर जस्टिस भानुमति ने कहा, पहली दया याचिका खारिज हो गई। यह दूसरी दया याचिका है।  
 
- वकील एपी सिंह ने कहा- पुलिस दस्तावेजों से उम्र को वेरीफाई कर चुकी है। लेकिन इस रिपोर्ट को छिपा दिया गया। 

- जस्टिस भानुमति ने पूछा- ये तथ्य आप ट्रायल और विशेष याचिका में भी उठा चुके हैं। इनका आज क्या लेना देना? 
 
- एपी सिंह ने कहा, 3.30 पर जब मैं यहां बहस कर रहा हूं। मैं पटियाला कोर्ट में ये बता चुका था कि मैंने सुप्रीम कोर्ट में अक्षय की याचिका लगाई है। लेकिन पटियाला कोर्ट ने न्याय की हत्या करते हुए मेरी याचिका रद्द कर दी। जबकि इस कोर्ट में यह सुनवाई चल रही है। 

- जस्टिस भूषण ने पूछा- आप किस आधार पर इस राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती दे रहे हैं। आप उन तथ्यों को उठा रहे हैं, जो पहले भी सुनी जा चुकी हैं। 

-  एपी सिंह ने पवन गुप्ता की एफआईआर का जिक्र किया। उन्होंने कहा, पवन गुप्ता की मंडोली जेल में एफआईआर अभी पेंडिंग है। उसके बयान रिकॉर्ड किए जाने चाहिए। उसके सिर पर 14 टांके आए थे।  


हाईकोर्ट में क्या हुआ? : हाईकोर्ट में फांसी पर रोक लगाने की मांग के साथ दायर की थी याचिका

दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा,  इस मामले में डेथ वारंट जारी किया गया है। अनुच्छेद 32 के तहत याचिका आज के लिए तय की गई थी, सुनवाई के समय मैंने ट्रायल कोर्ट के समक्ष सब तथ्य रखे जो सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ही निचली अदालत ने फांसी पर रोक लगाने की याचिका खारिज कर दी। 

हाईकोर्ट के जज जस्टिस मनमोहन ने कहा, इस मामले में कुछ भी नहीं है, कोई हलफनामा नहीं है, कुछ भी नहीं है। क्या आपके पास याचिका दायर करने की अनुमति है। 

वकील- कोरोना वायरस के चलते कोई भी फोटोकॉपी नहीं करा पाया।  

जस्टिस मनमोहन- कोर्ट कैसे काम कर रही हैं। आज आपने तीन कोर्ट में दरवाजा खटखटाया। आप ये बहाना नहीं बना सकते कि सब कुछ बंद है। हम रात 10 बजे आपकी सुनवाई कर रहे हैं। 

वकील- एपी सिंह ने कहा, इस मामले से संबंधित तमाम मामले कई अदालतों में चल रहे हैं। जैसे अक्षय की तलाक याचिका, अंतरराष्ट्रीय अदालत में याचिका, लूट के मामले में हाईकोर्ट में मामला, चुनाव आयोग में भी एक याचिका दायर की है। 

जस्टिस मनमोहन- इन सभी तर्कों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इन सबका कोई मतलब नहीं है। चुनाव आयोग का भी यहां कुछ लेना देना नहीं है। आपका फैसला हो चुका है। आप यहां बैठकर जजमेंट पर सवाल नहीं उठा सकते। हम यह नहीं कह सकते कि डेथ वारंट रद्द होगा। 
  
वकील ने कहा, इस मामले में सिर्फ एक ही गवाह था, जो निर्भया के साथ था और उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता। उसने इंटरव्यू के लिए पैसे लिए। मीडिया ने इसका इस्तेमाल किया है। 

जस्टिस मनमोहन ने कहा, तलाक की अर्जी का इससे कोई लेना देना नहीं है। इस तरह के तर्क रात 11 बजे आपकी मदद नहीं करेंगे। 

जस्टिस ने कहा, अगर आप इस तरह के तर्क रखेंगे तो हम आपकी मदद नहीं कर सकते। आपके पास सिर्फ 4-5 घंटे हैं, अगर आप इनका इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो तर्क संगत तथ्य रखें। इसके साथ ही जस्टिस ने समय बर्बाद करने के लिए वकील की फटकार लगाई। 

जस्टिस मनमोहन ने कहा, ये क्या हो रहा है? हमें नहीं पता क्या किृ किसी की हत्या हुई थी। कोई सिस्टम खेल रहा है ... दया याचिकाएं लगाई जा रही हैं। अभी भी फांसी रोकने के लिए साजिश की जा रही हैं ... आपको अपने मुवक्किल और मुवक्किल को हमारे प्रति निष्पक्ष होना होगा। आपको 11बजे कुछ तथ्यों के साथ आना चाहिए। आपकी याचिका में कोई आधार नहीं है।
 
वकील ने कहा, मैं कोरोना वायरस के चलते निराशजनक है। हम दस्तावेजों की फोटोकॉपी नहीं करा पाए। मेरे पास सब कुछ है लेकिन कॉपी नहीं दे पाया, क्योंकि मैं नहीं करवा पाया। 

- जज ने कहा, हम उनकी मदद करते हैं, जो समय से आते हैं। 4 मार्च, 2020 तक ढाई साल तक आप क्या कर रहे हैं? आप हम पर आरोप लगा रहे हैं? 
 
वकील ने कहा, हमें 2-3 दिन का वक्त दें, हम सभी दस्तावेज जमा कर देंगे। 

 - एपी सिंह ने कहा, देरी जानबूझकर नहीं की गई है। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पर ध्यान देने की जरूरत है। मैंने निचली अदालत सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में यह सब रखा है। 

हाईकोर्ट- यह चौथा डेथ वारंट हैं। इन्हें कुछ सम्मान देना चाहिए। हम उन मामलों को नहीं सुनेंगे जो पहले ही सुप्रीम कोर्ट में सुने जा चुके हैं। एक बार जब आपने याचिका को दायर करने का फैसला किया, तो आपके पास याचिका में आपके पर्याप्त तथ्य होने चाहिए।

एपी सिंह- अगर आप वक्त देंगे तो हम तथ्य रखेंगे। 

हाईकोर्ट- हम आपको एक नई तारीख देंगे लेकिन यह उस वक्त भी बेकार साबित होगा। आप अपनी याचिका में तथ्यों को बिना रखे, रोक नहीं लगवा सकते। आपको अच्छे तथ्य लाने चाहिए। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। लेकिन दोषियों के दूसरे वकील शेम्स ख्वाजा ने अपनी दलीलें रखीं।

वकील ने कहा, राष्ट्रपति ने दया याचिका को खारिज करते हुए सभी तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया।

जज ने टोकते हुए कहा, यह समय इन सब बातों का नहीं है। 

वकील ने कहा, यह मामला पहले नहीं उठाया गया। 

जज ने कहा, यह आपको अपने आप से पूछना चाहिए कि यह बात पहले क्यों नहीं उठाई।  

वकील- यह न्याय की हत्या है। 

जज- एक बार जज, जिस फैसले पर हस्ताक्षर कर दें तो उसे वह दोबारा नहीं सुन सकता। आप इसे ऊपर ले जाना चाहते हैं तो चाहिए। हम यहां 5.30 बजे तक फैसला करने के लिए बैठे हैं। 

हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। 

चौथा डेथ वारंट जारी किया
पटियाला कोर्ट ने 5 मार्च को चौथा डेथ वारंट जारी किया। इसके मुताबिक, 20 मार्च को चारों दोषियों को फांसी दी जानी है। हालांकि, इससे पहले तीन बार डेथ वारंट जारी किया जा चुका है, लेकिन कानूनी दांवपेंच के चलते इसे टाल दिया गया।

2012 में निर्भया के साथ हुई थी दरिंदगी
16 दिसंबर, 2012 की रात में 23 साल की निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 6 लोगों ने दरिंदगी की थी। साथ ही निर्भया के साथ बस में मौजूद दोस्त के साथ भी मारपीट की गई थी। दोनों को चलती बस से फेंक कर दोषी फरार हो गए थे।

इसके बाद निर्भया का दिल्ली के अस्पताल में इलाज चला था। जहां से उसे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया था। 29 दिसंबर को निर्भया ने सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।

कोर्ट ने 6 आरोपियों को दोषी ठहराया था। एक नाबालिग था, जिसे 3 साल सुधारगृह में रहने के बाद छोड़ दिया गया। वहीं, एक अन्य दोषी राम सिंह ने जेल में ही फांसी लगा ली। अब चार दोषियों को फांसी दी जानी है। 

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