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निर्भया केस : दोषी विनय की याचिका खारिज, खुद को पागल बताकर हाई लेवल मेडिकल ट्रिटमेंट की मांग की थी

निर्भया के दोषी विनय की एक याचिका पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन ने विनय की एक रिपोर्ट सौंपी। सरकारी वकील इरफान अहमद ने कहा, दोषी विनय शर्मा की मानसिक बीमारी का कोई मेडिकल रिकॉर्ड नहीं है।

Nirbhaya convicts Advocate AP Singh said that if I am a liar I will stop advocating kpn
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New Delhi, First Published Feb 22, 2020, 4:06 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने दोषी विनय शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया। दोषी ने उच्च स्तरीय चिकित्सा देने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन ने विनय की एक रिपोर्ट सौंपी। सरकारी वकील इरफान अहमद ने कहा, दोषी विनय शर्मा की मानसिक बीमारी का कोई मेडिकल रिकॉर्ड नहीं है। वकील एपी सिंह का दावा झूठा है। बता दें कि एपी सिंह ने दावा किया था कि विनय मानसिक रूप से बीमार है। उसे सिजोफ्रेनिया नाम की मानसिक बीमारी है। वह अपने मां को भी नहीं पहचान रहा है। ऐसे में उसे फांसी नहीं दी जा सकती है।  

"वीडियो देखिए, सब पता चल जाएगा, मैं झूठा हुआ तो वकालत छोड़ दूंगा"
सुनवाई के बाद कोर्ट के बाहर एपी सिंह ने कहा, मैं 18फरवरी को विनय शर्मा से मिला था। उस समय वीडियोग्राफी हुई थी। वीडियोग्राफी की रिपोर्ट लाइए।पता चल जाएगा कितने लोग विनय पागल को पकड़ कर लाए। कैसे वो मुझे पहचान नहीं रहा था ? उसका सीधा हाथ टूटा था. अगर वीडियो में ये सब ना हो तो मैं वकालत छोड़ दूंगा।

तिहाड़ जेल ने पूछा, आखिरी बार परिजनों से कब मिलना चाहते हैं?
3 मार्च को चारों दोषियों को फांसी होनी है। तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों को लिखित रूप से परिवार से मिलने के लिए सूचित कर दिया है। मुकेश और पवन को बताया गया है कि वो परिवारों से अंतिम मुलाकात कर चुके हैं। वहीं, दो अन्य दोषियों अक्षय और विनय से पूछा गया है कि वे कब परिवार से मुलाकात करना चाहते हैं।  

16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया से गैंगरेप हुआ था
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।

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