लोकसभा में 'एक देश, एक चुनाव' विधेयक पेश हो गया है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत विपक्ष की कई पार्टियों ने इसका विरोध किया है। 

नई दिल्ली। एक देश एक चुनाव (One Nation One Election) विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी समेत विपक्ष की कई पार्टियों ने इसका विरोध किया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बिल पेश किया। विपक्ष के नेताओं द्वारा इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी जा रही है। 

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एक देश एक चुनाव को लेकर लोकसभा में पेश किए गए बिल के आधिकारिक नाम संविधान (129 संशोधन) विधेयक 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक हैं। एक देश एक चुनाव के लिए भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पहले वादा किया था। उम्मीद की जा रही है कि मेघवाल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनुरोध करेंगे कि इसे और अधिक विचार-विमर्श के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेज दें।

संयुक्त समिति का गठन आनुपातिक आधार पर किया जाएगा। भाजपा के एक पदाधिकारी के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा समिति की अध्यक्षता करेगी। समिति में इसके कई सांसद होंगे। मंगलवार शाम को लोकसभा अध्यक्ष समिति के गठन की घोषणा कर सकते हैं।

विपक्ष ने किया है एक देश एक चुनाव का विरोध

बता दें कि विपक्ष ने एक देश एक चुनाव का विरोध किया है। राहुल गांधी, ममता बनर्जी और एमके स्टालिन समेत कई विपक्षी नेताओं ने इसके विरोध में बयान दिए हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे सत्ताधारी पार्टी को फायदा होगा। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि एक बार में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव कराने से देश के संसाधन बचेंगे। सरकार को काम करने का ज्यादा अवसर मिलेगा।

केंद्र सरकार ने देशभर में सभी चुनाव एक साथ कराने के संबंध में सुझाव देने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट के सुझावों को स्वीकार करते हुए केंद्र ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' विधेयक को दो चरणों में लागू करने का फैसला किया है। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। दूसरे चरण में आम चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) होंगे।

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