कोविड के संक्रमण से पूरा देश बेहाल है। महामारी को नियंत्रित करने के लिए वैक्सीनेशन ही अब विकल्प बचा है। वैक्सीन खरीदारी को लेकर विपक्ष लगातार बयान दे रहा है। कई बयान पूर्व बयान के बिल्कुल उलट साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर विपक्ष के यू-टर्न पर ट्रोलिंग भी हो रही है। लोग विपक्ष को एक लाइन पर रहने की नसीहत भी दे रहे हैं। आइए जानते हैं विपक्ष के वह नौ यू-टर्न वाले बयान...

नई दिल्ली। कोविड के संक्रमण से पूरा देश बेहाल है। महामारी को नियंत्रित करने के लिए वैक्सीनेशन ही अब विकल्प बचा है। वैक्सीन खरीदारी को लेकर विपक्ष लगातार बयान दे रहा है। कई बयान पूर्व बयान के बिल्कुल उलट साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर विपक्ष के यू-टर्न पर ट्रोलिंग भी हो रही है। लोग विपक्ष को एक लाइन पर रहने की नसीहत भी दे रहे हैं। आइए जानते हैं विपक्ष के वह नौ यू-टर्न वाले बयान...

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1- कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर मांग किया, जिसमें पार्टी के सभी वरिष्ठ लोगों के हस्ताक्षर थे, कि वैक्सीन केंद्रीय स्तर पर खरीदी जाए। लेकिन राहुल गांधी ने अप्रैल में यू-टर्न लेते हुए पत्र लिखा कि राज्यों को वैक्सीन खरीदने के लिए अधिक शेयर मिले। केवल राहुल गांधी ही नहीं कई कांग्रेस नेता भी यह मांग करते आए। 

2- कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पत्र में लिखा कि केंद्र सरकार फ्री वैक्सीनेशन कराए तथा सभी को एक ही माध्यम से वैक्सीन उपलब्ध कराई जाए। लेकिन इसके विपरीत अभिषेक मनु सिंघवी और शशि थरूर कई बार यह मांग कर चुके हैं कि प्राइवेट माध्यमों से भी वैक्सीनेशन कराई जाए। 

3- सोनिया गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मांग किया कि देश में वैक्सीन प्रोडक्शन को बढ़ाया जाना चाहिए। जबकि पहले अखिलेश यादव ने बीजेपी वैक्सीन्स कहते हुए रिजेक्ट कर दिया था। उधर, कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और अन्य कांग्रेसी भारत में बन रहे वैक्सीन के खिलाफ लगातार भड़काने वाली बात कर रहे हैं।

4- विपक्ष ने कहा कि केंद्र अलाॅट किए गए बजट को वैक्सीन के लिए खर्च करे। देश में 17.59 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाया जा चुका है। इसमें करीब 16 करोड़ लोगों को फ्री में वैक्सीन दिया गया। 

5- सोनिया गांधी, शरद पवार और कई अन्य विपक्ष के नेता सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को रोकने की मांग कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट महामारी के पहले का है। लेकिन विपक्ष छत्तीसगढ़ में नया विधानसभा भवन और महाराष्ट्र में विधायक निवास बनाने का निर्णय महामारी के दौरान ही ले लिया। 

6-सोशल मीडिया पर कहा जा रहा कि सोनिया गांधी पीएम केयर्स को अनाकाउंटेड होने पर सवाल उठा रहीं है। लेकिन पीएम नेशनल रिलीफ फंड यूपीए के सरकार में भी ऐसे ही था। सोनिया गांधी आजीवन उसकी सदस्य हैं और रामेश्वर ठाकुर आडिटर। इस अकांउट से राजीव गांधी फाउंडेशन को भी धन गया। 

7- ममता बनर्जी और शरद पवान केंद्र से मांग कर रहे हैं कि गरीबों को धन दें। लेकिन ममता बनर्जी अपने राज्य में पीएम किसान योजना को लागू करने नहीं दे रहीं। 

8- विपक्ष के 12 नेताओं ने लोगों को मुफ्त राशन देने की मांग की है। केंद्र सरकार नवम्बर 2020 से पीएम गरीब कल्याण योजना से 80 करोड़ लोगों को लाभ देते हुए राशन वितरण कराया जा रहा। यह अभी भी जारी है। 

9- कांग्रेस अध्यक्ष और शरद पवार कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग कर रहे। जबकि कांग्रेस ने 2019 के चुनाव घोषणा पत्र में यह आश्वासन दिया था कि एपीएमसी को खत्म कर कृषि उत्पाद की बिक्री के लिए मार्केट को फ्री करेंगे। 

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