नई दिल्ली. पीएम मोदी सोमवार की सुबह कोरोना की वैक्सीन लगवाई। वैक्सीन लवगाने के दौरान उन्होंने एक साथ कई संदेश दिए। सबसे बड़ा संदेश तो यही था कि जो लोग स्वदेशी वैक्सीन COVAXIN को लेकर शंका जाहिर कर रहे हैं, उसकी क्षमता पर सवाल खड़े कर रहे हैं उन्हें साफ संदेश था कि देखो मैं भी यही वैक्सीन लगवा रहा हूं और यह पूरी तरह से सुरक्षित है। 

सवाल उठाने वाले नेताओं को दिया जवाब

पीएम ने सोमवार की सुबह विपक्ष में बैठे उन नेताओं को भी जवाब दे दिया, जो वैक्सीन लगवाने के पहले चरण से ही सवाल पूछ रहे थे कि पीएम मोदी वैक्सीन क्यों नहीं लगवा रहे हैं? बता दें कि 1 मार्च से वैक्सीन लगवाने का दूसरा चरण शुरू हुआ है, जिसमें 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन लगेगी। पीएम मोदी ने इसी के तहत वैक्सीन लगवाई।     

 

 

जिस वैक्सीन पर सवाल उठे, उसे लगवाया

पीएम मोदी सुबह करीब 6.30 बजे दिल्ली के एम्स पहुंचे। उन्होंने वहां पर स्वदेशी वैक्सीन  COVAXIN लगवाई। 

पुडुचेरी और केरल की नर्स ने लगाया वैक्सीन

पीएम मोदी को COVAXIN लगवाने वाली पुडुचेरी की सिस्टर पी निवेदा हैं। पी निवेदा के साथ जो दूसरी नर्स थीं, वह केरल की रोसम्मा अनिल थीं।

 

 

पीएम ने असम का गमछा लिया था

COVAXIN वैक्सीन लगवाने के दौरान पीएम मोदी ने जो गमछा लिया था, वह असम का था। वह गमछा महिलाओं के आशीर्वाद का प्रतीक है। पीएम मोदी इस गमछे में कई कार्यक्रमों में देखे गए हैं।  

बिना तय रूट एम्स पहुंच पीएम मोदी

पीएम मोदी का कोरोना वैक्सीन लगवाने का पहले से कोई तय कार्यक्रम मीडिया को नहीं पता था। पीएम मोदी सुबह बिना किसी तय रूट सुबह के वक्त एम्स पहुंच गए।

COVAXIN के बारे में पूरी जानकारी

COVAXIN को हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक और आईसीएमआर ने तैयार किया है। COVAXIN को कोरोनोवायरस के कणों का इस्तेमाल करके बनाया गया है, जो उन्हें संक्रमित या दोहराने में असमर्थ बनाते हैं। इन कणों की विशेष खुराक इंजेक्ट करने से शरीर में मृत वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाने में मदद करके इम्यून का निर्माण होता है।

कितनी प्रभावी है ये COVAXIN?

डीजीसीआई के मुताबिक, COVAXIN सुरक्षित और एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया प्रदान करता है। ट्रायल के पहले और दूसरे चरण में लगभग 800 लोगों पर परीक्षण किया गया था और नतीजों से पता चलता है कि वैक्सीन सुरक्षित है और इम्यून प्रदान करता है। वहीं, तीसरे चरण में अब तक 25,800 वॉलंटियर पर ट्रायल किया जा चुका है। वहीं, करीब 22500 लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है। वैक्सीन सुरक्षित पाई गई है।