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भाजपा सांसद को मोदी के लिए क्यों गाना पड़ा 'प्यासा' का गाना, कहा- जाने क्या तूने कही, जाने क्या मैंने सुनी

बजट संत्र के दौरान भाजपा सांसद डॉक्टर सोनल मानसिंह ने प्यासा फिल्म का एक गाने का जिक्र किया। गाना पीएम मोदी को लेकर कहा गया। सांसद डॉक्टर सोनल मानसिंह ने किसानों के मु्द्दों पर कहा, मैं कहीं किसी फिल्म में सुना था, जाने क्या तूने कही, जाने क्या मैंने सुनी, बात कुछ ऐसी बनी। प्रधानमंत्री मोदी को जो अद्भुत बातें हैं। किसानों को लेकर। वह अच्छे से सुनी जाती। तो बात ऐसे-ऐसे के बदले अच्छी तरीके से आगे बढ़ती।
 

Rajya Sabha MP Sonal Mansingh singh song of the film Pyaasa kpn
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New Delhi, First Published Feb 5, 2021, 3:06 PM IST
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नई दिल्ली. बजट संत्र के दौरान भाजपा सांसद डॉक्टर सोनल मानसिंह ने प्यासा फिल्म का एक गाने का जिक्र किया। गाना पीएम मोदी को लेकर कहा गया। सांसद डॉक्टर सोनल मानसिंह ने किसानों के मु्द्दों पर कहा, मैं कहीं किसी फिल्म में सुना था, जाने क्या तूने कही, जाने क्या मैंने सुनी, बात कुछ ऐसी बनी। प्रधानमंत्री मोदी को जो अद्भुत बातें हैं। किसानों को लेकर। वह अच्छे से सुनी जाती। तो बात ऐसे-ऐसे के बदले अच्छी तरीके से आगे बढ़ती।

डॉक्टर सोनल मानसिंह का वीडियो

 

किसानों के आंदोलन पर तोमर ने क्या कहा?

कृषि कानूनों को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, मैंने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार संशोधन करने के लिए तैयार है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि कृषि कानूनों में कोई समस्या है। किसी विशेष राज्य के लोग गलत सूचना देते हैं। किसानों को गुमराह किया जा रहा है कि अगर इन कानूनों को लागू किया गया तो अन्य लोग उनकी जमीन पर कब्जा कर लेंगे। मुझे पता है कि क्या अनुबंध कृषि कानून में कोई प्रावधान है जो किसी भी व्यापारी को किसी भी किसान की जमीन छीनने की अनुमति देता है।

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने क्या-क्या कहा?

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने राज्यसभा में कहा, हम 26 जनवरी की हिंसा के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हैं। किसी को भी उन पर हमला करने का अधिकार नहीं है जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। लाल किले की घटना ने पूरे देश में स्तब्ध कर दिया है और इसकी जांच होनी चाहिए। 

आनंद शर्मा ने कहा, महामारी के दौरान कृषि कानूनों को अध्यादेश के माध्यम से लाया गया था। यह असंवैधानिक है। तीनों कृषि कानूनों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। तीनों कृषि कानूनों की संवैधानिकता को एक बार जांचा जाना चाहिए और उन्हें निरस्त किया जाना चाहिए। 

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