सुप्रीम कोर्ट ने Electoral bonds (इलेक्टोरल बांड ) की ब्रिकी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने प बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव से पहले नए Electoral bonds की बिक्री पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुरक्षित रखा था। 

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने Electoral bonds (इलेक्टोरल बांड ) की ब्रिकी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को फैसला सुनाया। कोर्ट ने प बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव से पहले नए Electoral bonds की बिक्री पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुरक्षित रखा था। 

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इस मामले में याचिका दाखिल कर कहा गया था कि इस व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं। राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का स्रोत पता नहीं चलता। कॉरपोरेट से मिलने वाला गुप्त दान लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है। ऐसे में इनकी बिक्री पर रोक लगाई है। वहीं, इस मामले में फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस एसए बोबडे की बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार इलेक्टोरल बांड से जुड़े किसी भी संभावित दुरुपयोग के मामले को देखे।

भारत के वित्तीय सिस्टम पर पड़ रही विपरीत असर
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हम कोर्ट का ध्यान आरबीआई के गवर्नर द्वारा भारत सरकार को लिखे पत्र पर लाना चाहता हूं। इसमें कहा गया था कि इलेक्टोरल बांड स्कीम खतरों से भरी है। इसका देश के वित्तीय सिस्टम पर उल्टा असर पड़ रहा है।