दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सवारी की अनुमति देने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "आप (दिल्ली सरकार) मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सवारी देने की कोशिश क्यों कर रहे हैं। यह डीएमआरसी के लिए लाभदायक कदम नहीं होगा। इससे घाटा होगा।"

नई दिल्ली. दिल्ली मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सवारी की अनुमति देने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई है। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "आप (दिल्ली सरकार) मेट्रो में महिलाओं को मुफ्त सवारी देने की कोशिश क्यों कर रहे हैं। यह डीएमआरसी के लिए लाभदायक कदम नहीं होगा। इससे घाटा होगा।" अरविंद केजरीवाल ने इसी साल जून महीने में महिलाओं के लिए मेट्रो में फ्री सेवा का ऐलान किया था। 

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"दिल्ली सरकार मेट्रो को बर्बाद करना चाहती है"

- जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा,"आप (दिल्ली सरकार) यात्रा को मुफ्त कर देंगे, लेकिन केंद्र सरकार को इसका भुगतान करना होगा।"

- "आप (दिल्ली सरकार) की नीति से केंद्र सरकार को परेशानी होगी। आप (दिल्ली सरकार) मेट्रो को बर्बाद करने का प्लान बना रहे हैं। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग के बिना दिल्ली सरकार की इस योजना को लागू नहीं किया जा सकता है।" 

"जनता के पैसे को सही तरीके से खर्च करें" 

- अदालत ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा कि उसे जनता के पैसे को सही तरीके से खर्च करना चाहिए। लोगों को मुफ्त सेवा ​​देने से बचना चाहिए। डीएमआरसी का वार्षिक राजस्व 6000-7000 करोड़ रुपए के बीच है। अदालत ने कहा कि अगर मुफ्त सेवा दी जाती है तो डीएमआरसी को एक साल का सीधा नुकसान होगा। दिल्ली सरकार को लागत कम रखने की रणनीति तैयार करनी चाहिए। 

- सुप्रीम कोर्ट डीएमआरसी के चौथे चरण की निगरानी कर रहा है, जो 100 किमी. से अधिक लंबा है। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 18.6 लाख पैसेंजर्स को जोड़ा जा सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेट्रो के चरण 4- के लिए जमीन की लागत का 50% केंद्र सरकार देगी। भूमि अधिग्रहण के लिए केंद्र सरकार ने 600 करोड़ रुपए जारी करेगी।