भोपाल. मध्य प्रदेश में 15 महीने तक सरकार चलाने के बाद आज शुक्रवार को सीएम कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया है।  सुप्रीम कोर्ट ने शाम 5 बजे तक फ्लोर टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन कमलनाथ ने उससे पहले ही त्याग पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है। इसके बाद अब मध्यप्रदेश में भाजपा की सत्ता में वापसी का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे में 5 प्वाइंट में समझिए अब आगे क्या-क्या संभावनाएं बन रही है। 

1. सरकार बनाने के लिए BJP दावा पेश करे या राज्यपाल न्यौता भेजे 

कमलनाथ के इस्तीफे के बाद अब दो स्थितियां बन रही हैं। पहली- राज्यपाल मौजूदा स्थिति में सबसे बड़े दल बीजेपी को सरकार बनाने के लिए न्यौता भेज सकते हैं। भाजपा इसे स्वीकार कर प्रदेश में नई सरकार बना सकती है।( उसी प्रकार जैसे महाराष्ट्र में फडणवीस के इस्तीफा देने के बाद महाविकास अघाड़ी ने सरकार बनाई) सकती है। दूसरी- राज्यपाल के कहने से पहले ही भाजपा सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। वह विधायकों की दोबारा परेड करा सकती है और समर्थन पत्र सौंप सकती है।

2. भाजपा को भी फ्लोर टेस्ट से गुजरना पड़ेगा 

मध्यप्रदेश में सरकार बनाने के बाद भाजपा को फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा। जैसे पिछले साल महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के बाद उद्धव ठाकरे ने विधायकों के समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपकर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद भी उन्हें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से गुजरना पड़ा, जिसमें वे जीत गए। उसी प्रकार भाजपा को सरकार बनाने के बाद अपना बहुमत साबित करना होगा। 

3. 25 सीटों पर कराए जाएंगे उपचुनाव 

मध्यप्रदेश में विधानसभा में 230 सीटें हैं। दो विधायकों के निधन के कारण 2 सीटें खाली हैं। वहीं, सिंधिया खेमे के 22 विधायक बागी होकर अपना इस्तीफा दे दिया है। वहीं, शुक्रवार सुबह स्पीकर ने साफ किया कि भाजपा विधायक शरद कोल ने भी इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद प्रदेश की 25 विधानसभा की सीटें खाली हो गई है। इन सभी सीटों पर 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाएगा। 

4. 10 सीटों पर हासिल करनी होगी जीत  

मौजूदा समय में भाजपा के पास 106 विधायक हैं। 4 निर्दलीय उसके समर्थन में आए तो भाजपा+ की संख्या 110 हो जाती है। ऐसे में 25 सीटों पर उपचुनाव होने पर भाजपा को बहुमत के लिए 6 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी। यदि निर्दली भाजपा के साथ नहीं आए तो उपचुनाव में पार्टी को 10 सीटें जीतनी होंगी।

5. चौथी बार सीएम बनने वाले पहले शख्स हो सकते हैं शिवराज 

भाजपा द्वारा सरकार बनने की स्थिति में मुख्यमंत्री के लिए दावेदार शिवराज सिंह चौहान ही हैं। वे 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल सीएम रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे फिर सीएम बनते हैं तो ये मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका होगा, जब कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा। गौरतलब है कि शिवराज सिंह से पहले अर्जुन सिंह और श्यामचरण शुक्ला तीन बार सीएम रह चुके हैं। 

मध्यप्रदेश में क्या है स्थिति?

मध्य प्रदेश में कुल विधानसभा सीटें- 230
दो विधायकों को निधन के बाद यह संख्या- 228
22 विधायकों के इस्तीफे मंजूर
अब संख्या- 206
बहुमत के लिए चाहिए-104
भाजपा के पास- 107
कांग्रेस के पास- 99 (4- निर्दलीय, 2- बसपा, 1- सपा)