कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। चुनावी वादों को पूरा करते हुए 5 गारंटी लागू करने के बाद अब धर्मांतरण विरोधी कानून को खत्म करने का कैबिनेट ने निर्णय लिया है। 

Karnataka Government scraps Anti conversion Law: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने बीजेपी शासनकाल में लागू किए गए धर्मांतरण कानून को रद्द करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को राज्य कैबिनेट में यह प्रस्ताव सर्वसम्मित से पास कर धर्मांतरण कानून को रद्द कर दिया।सिद्धारमैया कैबिनेट ने राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में आरएसएस के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार की जीवनी को भी नहीं पढ़ाने का फैसला मंजूर कर लिया है। किसानों के लिए नई एपीएमसी कानून लाने का भी फैसला किया गया है। इसे किसानों की मांग के अनुरूप बनाया जाएगा।

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कांग्रेस सरकार के फैसले की दी जानकारी

सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के कैबिनेट डिसीजन के बारे में जानकारी देते हुए कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पिछली भाजपा सरकार द्वारा राज्य में पेश किए गए धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून को रद्द करने का फैसला किया है। राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। पिछले साल मई में बीजेपी की पूर्व सरकार ने धर्मांतरण कानून के लिए अध्यादेश लाया था। जबरदस्ती, गलत बयानी या प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन के खिलाफ अध्यादेश को कानून में बदलने के लिए सितंबर में राज्य विधानसभा में पेश किया गया था।

हेडगेवार की जीवनी नहीं पढ़ेंगे बच्चे

पाटिल ने बताया कि कर्नाटक राज्य के स्कूली कोर्स की किताबों में केशव बलिराम हेडगेवार की जीवनी थी। इतिहास की किताबों से आरएसएस संस्थापक हेडगेवार की जीवनी को भी कोर्स से हटाए जाने का निर्णय लिया गया है। हेडगेवार का चैप्टर एक साल पहले ही जोड़ा गया था। मंत्रिमंडल ने स्कूलों और कॉलेजों में भजन के साथ संविधान की प्रस्तावना को पढ़ना अनिवार्य करने का भी फैसला किया है।

किसानों के लिए भी लिया फैसला

कर्नाटक कैबिनेट ने कृषि बाजारों (APMC) पर एक नया कानून लाने का भी फैसला किया है, जो भाजपा के सत्ता में रहने के दौरान बनाए गए कानून की जगह लेगा।

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