नई दिल्ली। अयोध्या मामले की सुनवाई शनिवार सुबह 10.30 बजे शुरू हुई। सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं, शीर्ष कोर्ट ने माना है कि निर्मोही अखाड़ा सेवादार भी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दावा 6 साल बाद दाखिल हुआ। बता दें कि 30 सितंबर, 2010 को दिए इस फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन को राम जन्मभूमि करार दिया था। साथ ही, 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्माही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर कर दिया था। हाई कोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

40 दिन लगातार सुनवाई के बाद SC ने फैसला सुरक्षित रखा था : 
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में 2.77 एकड़ जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने रोजाना 40 दिन तक सुनवाई की है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। 2010 के इलाहाबाद के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 याचिका दायर की गईं थीं। 

मध्यस्थता विफल होने के बाद रोजाना सुनवाई कर रहा था सुप्रीम कोर्ट : 
मध्यस्थता प्रयास विफल हो जाने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 सदस्यों की बेंच इस मामले में रोजाना यानी हफ्ते में पांच दिन सुनवाई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को इस मामले को बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता समिति बनाई थी। मध्यस्थता समिति पूर्व जस्टिस एफएम कलिफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, सीनियर वकील श्रीराम पंचू शामिल थे।18 जुलाई को मध्यस्थता पैनल ने स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। उस वक्त चीफ जस्टिस ने समिति से जल्द ही अंतिम रिपोर्ट पेश करने को कहा था। बेंच ने कहा था कि मध्यस्थता से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला तो रोजाना सुनवाई पर विचार करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गईं थीं : 
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट अयोध्या में 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन समान हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। पहला-सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा- निर्मोही अखाड़ा और तीसरा- रामलला। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गईं हैं। बेंच इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है।