MalayalamNewsableKannadaKannadaPrabhaTeluguTamilBanglaHindiMarathiMyNation
  • Facebook
  • Twitter
  • whatsapp
  • YT video
  • insta
  • ताज़ा खबर
  • न्यूज
  • वेब स्टोरी
  • राज्य
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • बिज़नेस
  • सरकारी योजनाएं
  • खेल
  • धर्म
  • ज्योतिष
  • फोटो
  • Home
  • National News
  • लॉर्ड माउंटबेटन: भारत के आखिरी वायसराय की रहस्यमय हत्या आज भी पहेली

लॉर्ड माउंटबेटन: भारत के आखिरी वायसराय की रहस्यमय हत्या आज भी पहेली

लॉर्ड लुईस माउंटबेटन, आजाद भारत के पहले गवर्नर जनरल और आखिरी वायसराय थे। 1979 में उनकी रहस्यमय परिस्थितियों में हत्या कर दी गई। इस हत्या की गुत्थी कई दशक बाद भी रहस्य ही है। शक के दायरे में सीआईए और ब्रिटिश इंटेलीजेंस है।  

4 Min read
Author : Dheerendra Gopal
Published : Aug 27 2024, 04:22 PM IST
Share this Photo Gallery
  • FB
  • TW
  • Linkdin
  • Whatsapp
  • GNFollow Us
16
कौन थे लार्ड माउंटबेटन?
Image Credit : Getty

कौन थे लार्ड माउंटबेटन?

लार्ड लुईस माउंटबेटन, आजाद भारत के पहले गवर्नर जनरल थे। भारत के आखिरी वायसराय माउंटबेटन की देखरेख में ही भारत आजाद हुआ और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था। दरअसल, माउंटबेटन, ब्रिटिश रॉयल फैमिली से थे। वह क्वीन विक्टोरिया के परपोते थे और ब्रिटेन की महारानी क्वीन एलिजाबेथ II के चचेरे भाई थे।

26
पहले विश्वयुद्ध के दौरान पिता ने परिवार का नाम बदला
Image Credit : Getty

पहले विश्वयुद्ध के दौरान पिता ने परिवार का नाम बदला

दरअसल, लार्ड लुईस माउंटबेटन के पिता ने फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान अपने परिवार की टाइटल यानी नाम बैटनबर्ग से बदलकर माउंटबेटन कर दिया था। इसलिए लार्ड लुईस बैटनबर्ग का भी नाम लार्ड लुईस माउंटबेटन हो गया था। माउंटबेटन की फर्स्ट वर्ल्ड वार और सेकेंड वर्ल्ड वार के दौरान अहम भूमिका थी। 1945 में जापान को सरेंडर करने के लिए माउंटबेटन ने भी पहल की थी।

36
आजाद भारत का पहला गवर्नर जनरल
Image Credit : Getty

आजाद भारत का पहला गवर्नर जनरल

कूटनीतिक मोर्च पर सफल रहे लार्ड माउंटबेटन को ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने 1947 में भारत का वायसराय बनाकर भेजा। यह वह दौर था जब अंग्रेज भारत छोड़कर जाने लगे थे। ऐसे में उनको माउंटबेटन जैसा ही व्यक्ति चाहिए था। आखिरी वायसराय के रूप में भारत में पहुंचे माउंटबेटन ने भारत की अंतरिम सरकार को सत्ता हस्तांतरण और इसके बंटवारे का खाका तैयार किया। माउंटबेटन की देखरेख में ही भारत का बंटवारा-भारत व पाकिस्तान के रूप में हुआ था। आजादी के बाद माउंटबेटन को आजाद भारत का पहला गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया। जून 1948 तक वह भारत के गवर्नर जनरल रहे। इसके बाद सी.राजगोपालाचारी देश के गवर्नर जनरल बने। 1953 में लार्ड माउंटबेटन ब्रिटिश नौसेना में वापस चले गए। 1916 में माउंटबेटन ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी से करियर शुरू था और 1965 में रिटायर हो गए।

46
माउंटबेटन की हत्या
Image Credit : Getty

माउंटबेटन की हत्या

27 अगस्त 1979 का दिन इतिहास में एक काले दिन के रूप में दर्ज हुआ था। यह वह दिन था जब ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य और देश के आखिरी वायसराय लॉर्ड लुईस माउंटबेटन की हत्या कर दी गई। माउंटबेटन जिस 'शैडो वी' जहाज पर सवार थे, उस नाव को ही बम से उड़ा दिया गया। 'माउंटबेटनः देयर लाइव्स एंड लव्स' के लेखक एंड्र्यू लोनी ने बीबीसी को बताया था कि पचास पाउंड जेलिग्नाइट फट गया था। इससे लकड़ी, मेटल, कुशन, लाइफजैकेट, जूते और सबकुछ हवा में उड़ गया था। चंद सेकंड में ही वहां सन्नाटा छा गया। वो मनहूस सुबह 1979 में 27 अगस्त को सोमवार का दिन था। माउंटबेटन अपने जिस शैडो जहाज में सवार थे, उसमें उनके साथ उनकी बेटी पैट्रिशिया, उनके पति लॉर्ड जॉन ब्रेबॉर्न, उनके 14 साल के जुड़वा बेटे- टिमोथी और निकोलस और लॉर्ड ब्रेबॉर्न की मां डोरेन ब्रेबॉर्न भी थीं। उस जहाज पर काम करने वाला 15 साल का पॉल मैक्सवेल भी था। माउंटबेटन, निकोलस और मैक्सवेल की तुरंत मौत हो गई। अगले दिन डोरेन ब्रेबॉर्न की भी मौत हो गई। अन्य लोग बच गए थे।

56
कौन था इस हत्याकांड के पीछे?
Image Credit : Getty

कौन था इस हत्याकांड के पीछे?

लार्ड लुईस माउंटबेटन की हत्या के पीछे आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) का हाथ बताया गया। आयरिश आर्मी उस समय ब्रिटिश सेना को उत्तरी आयरलैंड से खदेड़ने के लिए संघर्षरत थी। आयरिश सेना को इसलिए इस हत्या का जिम्मेदार बताया गया क्योंकि 1978 में उन पर स्नाइपर्स से हमला हुआ था लेकिन वह बाल-बाल बच गए। हालांकि, हमला के बाद भी उनकी सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई। सबसे अहम यह कि हत्या के कुछ दिन पहले ही उनकी सुरक्षा हटा दी गई थी।

66
क्या सीआईए और ब्रिटिश इंटेलीजेंस की भूमिका?
Image Credit : Getty

क्या सीआईए और ब्रिटिश इंटेलीजेंस की भूमिका?

माउंटबेटन की हत्या पर से पर्दा कई दशक बाद भी नहीं उठ सका है। उनकी हत्या के बाद कई सवालों के जवाब आज भी नहीं मिल सके। जैसे हमला होने के बाद ब्रिटिश रॉयल फैमिली के मेंबर की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई। उनकी सुरक्षा क्यों हटा दी गई थी। इस हत्याकांड में ब्रिटिश इंटेलीजेंस और अमेरिकी खुफिया सर्विसेस सीआईए की भूमिका का संदेह हुआ था लेकिन किसी भी आरोप या रहस्य का राजफाश नहीं हो सका। दरअसल, मार्च 1979 में आयरिश नेशनल लिब्रेशन आर्मी ने उत्तरी आयरलैंड के शैडो सेक्रेटरी ऐरी नीव की हत्या कर दी थी। तब भी चेतावनी दी थी कि शाही परिवार के किसी सदस्य की हत्या की साजिश रची जा रही है। इसके बाद माउंटबेटन को उस साल उत्तरी आयरलैंड न जाने की सलाह दी गई थी, जिसे उन्होंने नजरअंदाज कर दिया था। माउंटबेटन के जहाज 'शैडो वी' की अक्सर सुरक्षा जांच की जाती थी और निगरानी रखी जाती थी। हालांकि, उनकी मौत से कुछ दिन पहले ही सुरक्षा हटा ली गई थी। बीबीसी हिस्ट्री पर छपे एक लेख के मुताबिक, पैट्रिक हॉलैंड नाम के आयरिश कैदी ने दावा किया था कि उसे जेल में मैकमोहन नाम के कैदी ने बताया था कि माउंटबेटन की हत्या ब्रिटिश इंटेलिजेंस ने करवाई थी। हॉलैंड माउंटबेटन हत्याकांड पर एक किताब लिखने की तैयारी कर रहा था लेकिन एक दिन वो मृत पाया गया। ऐसा भी माना जाता है कि माउंटबेटन की हत्या के पीछे अमेरिकी एजेंसी सीआईए का हाथ था।

यह भी पढ़ें:

बीजेपी ने कंगना रनौत को बयानबाजी से रोका: मंडी सांसद के ये बयान हैं बेहद विवादित

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

About the Author

DG
Dheerendra Gopal
धीरेंद्र गोपाल। 2007 से पत्रकारिता कर रहे हैं, 18 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी में काम कर रहे हैं। पूर्व में अमर उजाला से करियर की शुरुआत करने के बाद हिंदुस्तान टाइम्स और राजस्थान पत्रिका में रिपोर्टिंग हेड व ब्यूरोचीफ सहित विभिन्न पदों पर इन्होंने सेवाएं दी हैं। राजनीतिक रिपोर्टिंग, क्राइम व एजुकेशन बीट के अलावा स्पेशल कैंपेन, ग्राउंड रिपोर्टिंग व पॉलिटिकल इंटरव्यू का अनुभव व विशेष रूचि है। डिजिटल मीडिया, प्रिंट और टीवी तीनों फार्मेट में काम करने का डेढ़ दशक का अनुभव।

Latest Videos
Recommended Stories
Recommended image1
मकर संक्रांति: कहीं गर्दन की हड्डी रेती तो कहीं काटी नस, चाइनीज मांझे की बेरहमी से कांप उठेगा कलेजा
Recommended image2
Now Playing
Ariha Shah Case: साढ़े 4 साल से Germany में फंसी मासूम, मौसी ने बताया क्या है पूरा मामला
Recommended image3
Delhi Red Fort Blast: डॉक्टर, प्रोफेसर और मौलवी ने कैसे बुनी साजिश? NIA रिमांड पर उगलेंगे राज़
Recommended image4
गैंगस्टर अबू सलेम को 14 दिन की पैरोल देने से सरकार का इनकार, अब क्या बचा आखिरी रास्ता?
Recommended image5
45 लाख के गहने देख भी नहीं डोला मन, सफाईकर्मी की ईमानदारी देख सीएम ने दिया इनाम
NEWS
Hindi NewsLatest News in HindiWorld News in HindiBreaking News in HindiTechnology News in HindiAuto News in HindiToday News in HindiNational News in Hindi
SPORTS
Sports News in HindiCricket News in Hindi
ENTERTAINMENT
Bollywood News in HindiEntertainment News in HindiTV News in HindiSouth Cinema NewsBhojpuri News
BUSINESS
Business News in HindiMoney News in Hindi
CAREER
Sarkari NaukriSarkari YojanaCareer News in Hindi
ASTROLOGY
Aaj Ka RashifalRashifal in HindiTarot Card ReadingNumerology in HindiReligion News in Hindi
STATES
Rajasthan News in HindiUP News in HindiUttarakhand News in HindiDelhi News in HindiMaharashtra News in HindiPunjab News in HindiMP News in HindiBihar News in HindiJharkhand News in HindiHaryana News in HindiChhattisgarh News in Hindi
Asianet
Follow us on
  • Facebook
  • Twitter
  • whatsapp
  • YT video
  • insta
  • Download on Android
  • Download on IOS
  • About Website
  • Terms of Use
  • Privacy Policy
  • CSAM Policy
  • Complaint Redressal - Website
  • Compliance Report Digital
  • Investors
© Copyright 2025 Asianxt Digital Technologies Private Limited (Formerly known as Asianet News Media & Entertainment Private Limited) | All Rights Reserved