दो दशक से ज्यादा वक्त तक इराक के राष्ट्रपति रहे तानाशाह सद्दाम हुसैन को आज के दिन ही फांसी की सजा दी गई थी। सद्दाम हुसैन को साल 1982 में इराक में हुए दुजैल जनसंहार मामले में दोषी पाया गया, इसके बाद उन्हें उत्तरी बगदाद में फांसी दी गई। 

वॉशिंगटन. दो दशक से ज्यादा वक्त तक इराक के राष्ट्रपति रहे तानाशाह सद्दाम हुसैन को आज के दिन ही फांसी की सजा दी गई थी। सद्दाम हुसैन को साल 1982 में इराक में हुए दुजैल जनसंहार मामले में दोषी पाया गया, इसके बाद उन्हें उत्तरी बगदाद में फांसी दी गई। दुजैल में 148 शियाओं को मार दिया गया था। इराक के पूर्व राष्ट्रपति को 2003 में गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त कयास लगाए गए कि गिरफ्तार शख्स असली सद्दाम नहीं है। क्योंकि सद्दाम हुसैन ने दुश्मनों से बचने के लिए अपने चार हमशक्ल बनवाए थे। लेकिन अमेरिका के इस अफसर ने सद्दाम को पहचाना। 

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शुरुआती शासन के दौरान सद्दाम अमेरिका के चहते थे। उन्होंने अमेरिकी मदद से ईरान के खिलाफ युद्ध भी लड़ा। लेकिन 1990 में यह तस्वीर बदल गई, जब खाड़ी युद्ध शुरू हुआ। तब से अमेरिका और इराक एक दूसरे के सामने आ गए। 2003 में लंबे युद्ध के बाद सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया गया। 

जब सद्दाम गिरफ्तार हुए, तो उनकी पहचान करने के लिए एक विशेषज्ञ की जरूरत थी। यह काम जॉन निक्सन ने किया। जॉन निक्सन अमेरिकी एजेंसी सीआईए में भी अपनी सेवाएं दे चुके थे।


30 दिसम्बर 2006 को सद्दाम हुसैन को फांसी दी गई थी

निक्सन सीआईए में भर्ती होने से पहले ही इराक के राष्ट्रपति पर अध्ययन कर रहे थे। बीबीसी को एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया था कि उन्होंने यह मुश्किल काम कैसे किया। निक्सन दुनियाभर के तमाम बड़े नेताओं के बारे में गहरी जानकारी रखते हैं।

कैसे पता किया कि यह शख्स ही सद्दाम है

निक्सन ने अपनी किताब 'डिब्रिफिंग द प्रेसिडेंट: द इन्ट्रोगेशन ऑफ सद्दाम हुसैन' में भी इसका जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि सद्दाम हुसैन विरोधाभासों से भरे थे। जब उन्हें सद्दाम को पहचानने का काम सौंपा गया तो उन्होंने इस काम को आसानी से कर लिया। जब निक्सन ने उनसे सवाल किए तो उन्हें सद्दाम के वही तेवर दिखे, जिनके लिए वे जाने जाते थे। 

निक्सन पहले शख्स थे, जिन्होंने पहली बार सद्दाम से पूछताछ की। निक्सन बताते हैं कि उन्होंने इस दौरान सद्दाम का वह पक्ष भी देखा, जो मानवीयता से भरा था और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के उलट था। वह अपने आप में चमत्कारी व्यक्ति था, इस तरह के शख्स का मैं पहली बार सामना कर रहा था। हालांकि, ये भी हो सकता है कि वे इस तरह से सिर्फ अपने आप को पेश कर रहे हों। 

'घमंडी और बदतर भी थे सद्दाम' 
निक्सन बताते हैं कि सद्दाम का दूसरा पहलू भी था, जिसमें वे साफ तौर पर एक अशिष्ट, बदतर और घमंडी नजर आते थे। आपा खोने के बाद डरावने हो जाते थे। अमेरिका और ब्रिटेन ने जनसंहारक हथियार रखने का आरोप लगाते हुए ही इराक के खिलाफ युद्ध छेड़ा था, ऐसे में इसका पता लगाना भी जरूरी था। हालांकि, सद्दाम ने यह बताया था कि उन्होंने परमाणु कार्यक्रम को काफी पहले ही बंद कर दिया था। सद्दाम तिकरित के पास एक भूमिगत सुरंग में मिले थे