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लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक बिल पास, 99 : 84 का रहा रेशियो

भारत में आज ऐतिहासिक तीन तलाक बिल राज्यसभा में पास हो गया। बिल लोकसभा में पहले ही मंजूर हो गया था। बिल के पक्ष में 99 और विपक्ष में 84 वोट पड़े। अब बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पास होने के बाद कहा है कि ये बदलते भारत की तस्वीर है।

Triple talaq bill table on rajyasabha
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New Delhi, First Published Jul 30, 2019, 12:43 PM IST
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नई दिल्ली.  भारत में आज ऐतिहासिक तीन तलाक बिल राज्यसभा में पास हो गया। बिल लोकसभा में पहले ही मंजूर हो गया था। बिल के पक्ष में 99 और विपक्ष में 84 वोट पड़े। अब बिल राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बिल पास होने के बाद कहा है कि ये बदलते भारत की तस्वीर है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन भी किया। इससे पहले तीन तलाक बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव गिर गया। बिल को सिलेक्ट कमेटी में भेजने के समर्थन में 84 वोट तो वहीं विरोध में 100 वोट पड़े । तीन तलाक बिल पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह समेत कई सांसद ने अपने संशोधन रखे थे। अधिकतर सांसदों ने अपने संशोधन वापस ले लिए, लेकिन दिग्विजय सिंह के संशोधन पर वोटिंग की गई।  अब बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास नहीं भेजा जाएगा। इससे पहले बीजेपी, कांग्रेस, TMC ने सभी सांसदों को व्हिप जारी किया था। 

रविशंकर प्रसाद ने सभी सांसदों का जताया आभार

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक बिल पर जवाब देते हुए कहा - कानून के बिना पुलिस पीड़ित महिलाओं की शिकायत सुनने के लिए तैयार नहीं थी । मुस्लिम समाज की बेटियों के लिए न्याय पर ही सवाल क्यों उठते हैं। हमारी सरकार ने देश हित में बिना डरे फैसले लिए। तीन तलाक में 75 फीसदी महिलाएं आती हैं। उन सभी के बारे में विशेष तौर पर सोचना चाहिए। मंत्री रविशंकर ने सभी सांसदों का आभार जताया। साथ ही कहा- पैगम्बर साहब ने हजारों साल पहले इसे गलत करार दिया था और हम 2019 में बहस कर रहे हैं।
 

रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में पेश किया था बिल

इससे पहले बिल को चर्चा के लिए कानून मंत्री रविशंकर ने राज्यसभा में पेश किया था। इस कानून में तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। लोकसभा में 26 जुलाई को बिल पास हो चुका था। उन्होंने कहा था-   20 से ज्यादा इस्लामिक देशों ने तीन तलाक पर  प्रतिबंध लगा दिया है। भारत जैसे देश में ये बिल लागू नहीं हो सकता है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को असंवैधानिक घोषित किया है। 

33 साल बाद सामाजिक कुरीति को खत्म करने पर चर्चा
वहीं बीजेपी सांसद मुख्तार अब्बास नकवी ने तीन तलाक बिल पर चर्चा करते हुए कहा था- 33 साल बाद सदन सामाजिक कुरीति को खत्म करने पर चर्चा कर रहा है। सदन ने कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी करने की चर्चा की थी। कुरीति से इस्लाम का क्या लेना देना। इसे कई इस्लामिक देश गैर कानूनी और गैर इस्लामीक बताकर खत्म कर चुके। नकवी ने आखिर में शेर पढ़ते हुए कहा- तू दरिया में तूफान क्या देखता है, खुदा है निगेहबान क्या देखता है। तू हाकिम बना है तो इंसाफ देकर, तू हिन्दू-मुसलमान क्या देखता है।

जेडीयू और एआईएडीमके ने किया वॉक आउट
वहीं राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान जेडीयू और AIADMK ने वॉक आउट किया। JDU सांसद वशिष्ट नारायण सिंह ने कहा- हमारी पार्टी इस बिल के साथ नहीं है।  हर पार्टी की एक विचारधारा है।  उसके पालन के लिए वह स्वतंत्र है। विचार की यात्रा चलती रहती है। उसकी धाराएं बंटती रहती हैं। वशिष्ठ नारायण ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा-  विधेयक पर बड़े पैमाने पर जागरुकता फैलाने की जरूरत है। हमारी पार्टी बिल पर वॉक आउट करती है।

वोट बैंक नहीं नारी उत्थान का सवाल: रविशंकर

बिल को राज्यसभा में पेश करते हुए कानून मंत्री रविशंकर ने कहा था- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कार्रवाई नहीं हो पा रही है, छोटी छोटी बातों पर तलाक आज भी दिया जाता है।  हम इस वजह से कानून दोबारा लेकर आए हैं। इसमें रिहाई और समझौते के प्रावधान रखे गए हैं। हर बात को वोट बैंक से न तोलकर देखा जाए। यह सवाल नारी न्याय, नारी गरिमा और नारी उत्थान का है। एक तरफ बेटियां फाइटर प्लेन चला रही है। वहीं दूसरी तरफ तीन तलाक की पीड़ित बेटियों को फुटपाथ पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने सदन के लोगों से बिल को पास कराने की अपील की। 

महिला सशक्तिकरण के नाम पर महिलाओं के साथ अन्याय

कांग्रेस सांसद अमी याज्ञिक ने बिल पर बोलते हुए कहा था - यह बिल सिर्फ एक महिला नहीं बल्कि उसके पूरे परिवार से जुड़ा है। महिला सशक्तिकरण के बैंक ग्राउंड में हम भूल जाते हैं। कोर्ट के फैसले के बाद यह प्रैक्टिस नहीं रहनी चाहिए।  महिला सशक्तिकरण को सरकार ने एक कोर्ट में ला दिया है। आप महिला के साथ न्याय नहीं करने जा रहे। 
 


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क्यों हो रहा था बिल का विरोध

बिल में तीन तलाक को अवैध ठहराया गया है। विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया। तीन तलाक देने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। बिल में तीन तलाक को गैरजमानती अपराध रखा गया है। विपक्षी दलों की दलील है कि इसे जमानती बनाया जाए। तीन तलाक देने पर पति पर भारी जुर्माने का प्रावधान है। विपक्षी दलों और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इस पर आपत्ति है। पति पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि जज तय करेगा, विपक्षियों को इस पर भी आपत्ति है। बोलकर लिखकर, अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से तीन तलाक देना भी अवैध होगा। इस पर सभी की सहमति है। नाबालिग बच्चे को रखने का अधिकार महिला के पास होगा। इसको लेकर भी विरोध है। जिसमें कहा गया है कि पति जेल में होगा तो उसका भरण-पोषण कैसे होगा। गुजारा भत्ता और भरण पोषण का फैसला जज करेंगे, इस पर भी विरोध हुआ। पुलिस केवल तब एफआईआर दर्ज करेगी, जब पीड़ित पत्नी उसके रिश्तेदार या शादी के बाद उसके ससुरालपक्ष से किसी व्यक्ति की ओर से पुलिस से गुहार लगाई जाती है।

 

 

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