नई दिल्ली. टीआरपी स्कैम मामले में रिपब्लिक टीवी की सीओओ प्रिया मुखर्जी को कर्नाटक हाईकोर्ट ने 20 दिनों की ट्रांजिट बेल दे दी है. प्रिया मुखर्जी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दे रखी थी जिसके चलते उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई थी। हांलाकि पुलिस उन्हें मामले में फरार आरोपी बता रही थी। टीआरपी घोटाले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने मंगलवार को आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। चार हजार पन्नों के आरोपपत्र में पुलिस ने ऑडिटर्स, फॉरेंसिक विशेषज्ञों समेत 140 लोगों को गवाह बनाया है।

टीआरपी स्कैम मामले में दो आरोपियों को भी सरकारी गवाह बनाने के लिए अर्जी दी गई है। पुलिस के मुताबिक फिलहाल मामले की छानबीन चल रही है और आगे की जांच के बाद पूरक आरोपपत्र दायर किया जाएगा। मजिस्ट्रेट कोर्ट में दाखिल आरोपपत्र में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 465, 468, 406, 120बी, 201, 204, 212 और 34 के तहत आरोप लगाए हैं। मामले में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें रिपब्लिक टीवी के डिस्ट्रिब्यूशन हेड घनश्याम शर्मा भी शामिल हैं। पुलिस ने मामले में रिपब्लिक टीवी, न्यूज नेशन, फक्त मराठी, बॉक्स सिनेमा और वाऊ चैनलों के खिलाफ पैसे देकर फर्जी टीआरपी हासिल करने का आरोप लगाया है। 

पुलिस कर रही अहम सबूत मिलने का दावा 
पुलिस का दावा है कि मामले में पकड़े गए कई आरोपी चैनलों के अधिकारियों और जिन लोगों के घरों में टीआरपी मापने वाले बैरों मीटर लगे हैं, उन दोनों के साथ संपर्क में थे। आरोपियों ने चैनलों से पैसे लेकर खास चैनल देखने के लिए लोगों को पैसे बांटने की बात स्वीकार की है। फोन, लैपटॉप और बैंक खातों से इसके सबूत भी मिले हैं। मामले की जांच से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी द्वारा मामला दर्ज किए जाने पर हमने ही उन्हें मामले से जुड़े दस्तावेज मुहैया कराए थे। हम ईडी को मामले से जुड़ी सारी जानकारियां मुहैया कराएंगे। दोनों जांच एजेंसियों के बीच मतभेद की खबरें गलत हैं। बता दें कि ईडी में मामले की शिकायत मुंबई पुलिस से करने वाले हंसा ग्रुप के डिप्टी जनरल मैनेजर नितिन देवकर को पूछताछ के लिए बुलाया है।