CAG रिपोर्ट ने उजागर किया कि उत्तराखंड (Uttarakhand) में CAMPA फंड से 13.9 करोड़ रुपये वनीकरण (Afforestation) की जगह iPhone, लैपटॉप और फ्रिज खरीदने में खर्च किए गए। रिपोर्ट में कई अनियमितताओं का खुलासा हुआ। 

CAMPA fund scam: उत्तराखंड को हराभरा रखने के लिए पेड़-पौधों को लगाने के लिए मिल रहे फंड का जिम्मेदार बंदरबांट कर ले रहे। आलम यह कि पौधों को लगाने के लिए मिले करोड़ों रुपये को आईफोन, लैपटॉप और फ्रिज खरीदने में खर्च कर दिया गया है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जुलाई 2019 से नवंबर 2022 के बीच CAMPA (Compensatory Afforestation Fund Management and Planning Authority) के तहत मिले 13.9 करोड़ रुपये वनीकरण (Afforestation) की जगह गैर-जरूरी चीजों पर खर्च कर दिए गए। इस राशि का उपयोग iPhone, लैपटॉप, फ्रिज, कूलर और स्टेशनरी खरीदने में किया गया।

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वन लगाने के नाम पर फंड की लूट

जब किसी वन भूमि का उपयोग गैर-वन उद्देश्यों के लिए किया जाता है तो बदले में उतनी ही भूमि पर वृक्षारोपण किया जाना आवश्यक होता है। लेकिन CAG की रिपोर्ट बताती है कि उत्तराखंड (Uttarakhand) के वन विभाग ने इस नियम की अनदेखी की। रिपोर्ट के अनुसार, CAMPA फंड का उपयोग हरेला योजना (Harela Scheme), टाइगर सफारी (Tiger Safari), भवनों के नवीनीकरण, आधिकारिक दौरों, कोर्ट केसों और गैजेट्स खरीदने में किया गया।

गैरकानूनी भूमि उपयोग और देरी

CAG की रिपोर्ट में 52 मामलों का खुलासा हुआ, जहां 188.6 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वन उपयोग के लिए आवंटित कर दी गई। इसके बावजूद उपयोगकर्ता एजेंसियों (User Agencies) ने बिना अनुमति के सड़कों का निर्माण शुरू कर दिया और वन विभाग ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही इसे अपराध के रूप में दर्ज किया।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 37 मामलों में वनीकरण की प्रक्रिया को अंतिम स्वीकृति मिलने के आठ साल बाद शुरू किया गया, जिससे परियोजना की लागत 11.5 करोड़ रुपये बढ़ गई। जबकि CAMPA दिशानिर्देशों के अनुसार, फंड आवंटन के एक या दो साल के भीतर वनीकरण कार्य पूरा किया जाना चाहिए।

मात्र 33.5% पौधों की ही हुई जीवित रहने की दर

वन अनुसंधान संस्थान (FRI) द्वारा निर्धारित 60-65% पौधों की जीवित रहने की मानक दर के मुकाबले, CAMPA परियोजना में यह दर मात्र 33.5% रही।रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि पांच वन प्रभागों में 1,204 हेक्टेयर भूमि वनीकरण के लिए अनुपयुक्त थी, लेकिन फिर भी इसे उपयुक्त घोषित कर दिया गया। यह वन अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है। इसके बावजूद दोषी वन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बिना मंजूरी किए गए करोड़ों रुपये के भुगतान

CAG रिपोर्ट में कहा गया है कि CAMPA के सीईओ ने जुलाई 2020 से नवंबर 2021 के बीच वन प्रभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों को बिना आवश्यक स्वीकृति के करोड़ों रुपये वितरित किए। वन प्रधान सचिव द्वारा जारी आदेश का पालन नहीं किया गया।

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