मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्‍या मसले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले को चुनौती देने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। 

नई दिल्ली. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अयोध्‍या मसले पर बीते 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले को चुनौती देने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। लॉ बोर्ड के सदस्‍य सैयद कासिम रसूल इलियास ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है। 

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जमीन लेने से किया इंकार 

रविवार को लखनऊ में हुई बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया कि एक महीने में समीक्षा याचिका दायर की जाएगी। साथ ही बोर्ड ने अयोध्‍या में 5 एकड़ जमीन लेने से भी इनकार कर दिया है। दरअसल अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों ने अपील दाखिल किए जाने की इच्‍छा जताते हुए शनिवार को कहा था कि मुसलमानों को बाबरी मस्जिद के बदले कोई जमीन भी नहीं लेनी चाहिए। इन पक्षकारों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी से नदवा में मुलाकात के दौरान यह मांग रखी थी। आइए जानते हैं क्या है पुनर्विचार याचिका और क्या इससे पर्सनल लॉ बोर्ड की शिकायतों का समाधान होगा। 

पुनर्विचार याचिका के यह है प्रावधान 

  • पुनर्विचार याचिका के तहत सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी फैसले की समीक्षा हो सकती है।
  • पीड़ित पक्ष सुप्रीम कोर्ट के किसी आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर कर सकता है।
  • दरअसल पुनर्विचार याचिका किसी भी मामले में पहले के फैसलों का अपवाद है, जिसमें फैसले की समीक्षा की जाती है। 
  • कोर्ट द्वारा आदेश सुनाए जाने के 30 दिन के भीतर पुनर्विचार याचिका दायर करनी होती है।
  • कोर्ट पर यह निर्भर करता है कि वह रिव्यू पिटीशन को स्वीकार करे या उसे खारिज कर दे।
  • यदि कोर्ट द्वारा पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाती है तो उसके बाद कोर्ट क्यूरेटिव पीटिशन स्वीकर कर सकता है, जिससे उसकी प्रक्रिया में हुई किसी गलती या दुरुपयोग को रोका जा सके। सही तरीके से न्याय हो इसके लिए यह पीटिशन स्वीकार की जाती है।