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6 महीने पहले कृषि कानूनों को किसानों के हित में बताने वाले राकेश टिकैत अब उन्हीं के विरोध में हैं सड़कों पर

कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान सड़कों पर हैं। जहां किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर जुटे हैं। वहीं, सरकार इसे किसानों के हक में बता रही है। सरकार इस मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों पर राजनीति करने का भी आरोप लगा रही है।

Who is rakesh tikait and how he turned his opinion about farmers bill KPP
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New Delhi, First Published Dec 12, 2020, 1:30 PM IST
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नई दिल्ली. कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान सड़कों पर हैं। जहां किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर जुटे हैं। वहीं, सरकार इसे किसानों के हक में बता रही है। सरकार इस मामले में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों पर राजनीति करने का भी आरोप लगा रही है। इस किसान आंदोलन में एक नाम और चर्चा में है। वह राकेश टिकैत है। राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष रहे महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे हैं। 

कौन हैं राकेश टिकैट?
राकेश टिकैत किसानों के नेता हैं। वे इस विरोध प्रदर्शन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। उनके भाई इस संगठन के अध्यक्ष हैं। यह संगठन उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के साथ-साथ पूरे देश में फैला हुआ है। राकेश टिकैत दिल्ली पुलिस में नौकरी करते थे। लेकिन 1993-94 में वे नौकरी छोड़कर किसान संगठन से जुड़ गए। 

क्यों हैं चर्चा में?
दरअसल, राकेश टिकैट का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यह बयान कृषि कानूनों के पास होने के बाद आया था। हिंदुस्तान अखबार में 4 जून 2020 को छपे इस बयान में राकेश टिकैट ने कृषि कानूनों का समर्थन किया था। उन्होंने सरकार के इस कदम का स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि यह भाकियू की सालों पुरानी मांग थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार इस बात पर नजर रखे, कहीं किसान के बजाए बिचौलिए सक्रिय होकर फसल सस्ते दामों में खरीदकर दूसरे राज्यों में ना बेचने लगे। 

अब क्या कहा?
राकेश टिकैत अब कानूनों को काला कानून करार दे रहे हैं। उन्होंने कहा, केंद्र की मंशा स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा, अगर किसानों को विश्वास में लेकर कानून बनाए जाते तो यह आंदोलन नहीं होता। इसके अलावा उन्होंने कहा, जब तक ये काले कानून वापस नहीं लिए जाते, तब तक किसान सड़क पर ही रहेंगे। 

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