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कोरोना से 2 मिलियन भारतीयों की मौत की भविष्यवाणी की गई थी, लेकिन हमने खुद पर निराशा हावी नहीं होने दी

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ऑनलाइन दावोस एजेंडा समिट के दौरान कोरोना संकट के दौरान भारत की ताकत और इच्छाशक्ति के कई उदाहरण पेश किए। उन्होंने भारत की बढ़ती डिजिटल ताकत के बारे में भी बताया। मोदी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये दुनियाभर के टॉप 400 इंडस्ट्री लीडर्स को संबोधित कर रहे थे। इसमें भारत की रिफॉर्म ट्रैजेक्टरी और टेक्नोलॉजी में बढ़ते इस्तेमाल आदि मुद्दों पर चर्चा हुई।

World Economic Forum online Davos Agenda Summit on Thursday kpa
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India, First Published Jan 28, 2021, 12:17 PM IST
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नई दिल्ली. गुरुवार को दुनियाभर के टॉप 400 से ज्यादा इंडस्ट्री लीडर्स से प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रूबरू हुए। मोदी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ऑनलाइन दावोस एजेंडा समिट को संबोधित कर रहे थे। इसमें उन्होंने भारत की रिफॉर्म ट्रैजेक्टरी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल आदि विषयों पर अपनी बात रखी। इस दौरान मोदी ने कुछ कंपनियों के CEOs से बातचीत भी की। उनके सवालों का जवाब भी दिया। इस बार समिट का मुख्य मुद्दा कोविड-19 महामारी रहा। इस पर मोदी ने अपने विचार रखे और आगे की रणनीति बताई। फोकस कोरेाना वैक्सीन को दुनिया के आखिरी कोने तक पहुंचाना रहा। समिट में जलवायु परिवर्तन और अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दे भी शामिल रहे। वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम की इस साल मई में होने वाली सालाना बैठक सिंगापुर में होगी।

कोरोना पर बोले मोदी
पिछले साल मार्च-अप्रैल में दुनिया के नामी एक्सपर्ट ने क्या-क्या नहीं कहा था। किसी ने तो भारत में कोरोना की सुनामी आने की बात तक कही थी। किसी ने कहा था कि 2 मिलियन से ज्यादा लोगों की मौत होगी।
तब अंदाजा लगा सकते हैं कि हमारी हालत क्या होगी?लेकिन हमने निराशा हावी नहीं होने दी। हमने कोरोना के लिए खास इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया और लोगों को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार किया।
-अभी तक दुनिया में दो मेड इंडिया कोरोना वैक्सीन आई हैं। बहुत जल्द और वैक्सीन आएंगी।
-मोदी ने कहा कि जिस देश में दुनिया की 18 फीसदी आबादी रहती हो, उसने कोरोना से खुद को बचाया और पूरी मानवता को बड़ी त्रासदी से बचाया। जब कोरोना शुरू हुआ, तब हम मास्क, पीपीई किट और टेस्ट किट बाहर से मंगाते थे। आज भारत सिर्फ अपनी ही जरूरतें पूरी नहीं कर रहा, बल्कि अन्य देशों को भी भेज रहा है।-हमने दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना वैक्सिनेशन शुरू किया गया। हम दुनिया को भी वैक्सीन दे रहे हैं।

-मोदी ने कहा कि कोरोनाकाल में भारत उन देशों में से है, जो ज्यादा से अपने नागरिकों की जान बचाने में सफल रहा है।
-कोरोना की लड़ाई में भारत के प्रत्येक व्यक्ति ने धैर्य के साथ अपने कर्तव्यों का पालन किया। हमने 12 दिन में 23 लाख लोगों को कोरोना का टीक लगाया। कोरोना के खिलाफ लड़ाई को एक जन आंदोलन में बदल दिया। आज भारत कोविड वैक्सीन कई देशों में भेजकर वहां वैक्सीनेशन से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को तैयार करके वहां के नागरिकों का जीवन बचा रहा है।
-मोदी ने सर्वे संतु निरामया: का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि भारत ने हजारों वर्ष पुरानी प्रार्थना पर चलते हुए वैश्विक जिम्मेदारियों को निभाया। जब दुनिया के देशों में एयरस्पेस बंद थे, तब भारत ने एक लाख से ज्यादा नागरिकों को उनके देशों तक पहुंचाया। 150 से ज्यादा देशों को जरूरी दवाएं पहुंचाईं।

टिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बोले मोदी
भारत में 1.3 बिलियन से ज्यादा लोगों के पास आधार है। अकेले दिसंबर में ही भारत में 4 ट्रिलियन रुपये का लेनदेन यूपीआई से हुआ है।
भारत संभावनाओं से भरा वैश्विक खिलाड़ी है। मैं इसमें जोड़ना चाहूंगा कि भारत आत्मविश्वास से भरा खिलाड़ी है।

अर्थव्यवस्था पर मोदी
-मोदी ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि आर्थिक मोर्चे पर भी हालात तेजी से बदलेंगे। कोरोना काल में भी भारत ने इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट शुरू करके, रोजगार की विशेष स्कीम चलाकर आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखा। आज भारत आत्मनिर्भर बनने के संकल्प की ओर बढ़ रहा है। भारत की सफलता पूरे विश्व को मदद करेगी। हम ग्लोबल गुड्स ओर ग्लोबल सप्लाई चेन के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

जलवायु और इंडस्ट्रीज पर
मोदी ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के साथ भी तेजी से मेल कर रहा है। मोदी ने कहा कि इंडस्ट्री 4.0 रोबोट के लिए नहीं है, बल्कि इंसान के लिए है। मोदी ने कहा तकनीक लोगों सहयोग करे, किसी का जाल नहीं बने।

बता दें कि इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रॉ, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समिट को संबोधित कर चुके हैं। यह समिट 24 जनवरी से शुरू हुई थी। गुरुवार को इसका आखिरी दिन था। इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने हिस्सा नहीं लिया।

 

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