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काल बनकर आया संडे: एक दिन में 4 किसानों की मौत, किसी की बॉडी ट्राली में तो किसी की टेंट में मिली

बता दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहे देश के लाखों करोड़ों अन्नदताओं की लड़ाई जारी है। 39 दिन के संघर्ष में करीब  54 किसानों की मौत हो चुकी है। जिसमें से किसी ने आत्महत्या कर ली तो किसी जान बीमारी या कड़कड़ाती ठंड और हार्ट अटैक से गई। 

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Jalandhar, First Published Jan 3, 2021, 5:02 PM IST
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जालंधर/पानीपत. केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार 39 दिन से जारी है। इस आंदोलन के दौरान अब तक 54 किसानों की मौत हो चुकी है। लेकिन वह पीछे हटने को राजी नहीं हैं। इसी बीच एक और दुखद खबर सामने आई है। जहां पंजाब/हरियाणा के चार किसानों की रविवार के दिन मौत हो गई।

दो पंजाब तो दो हरियाणा के थे मृतक किसान
दरअसल, आंदोलन में मारे गए इन चारों किसानों में दो हरियाणा और दो पंजाब के रहने वाले थे। जिनकी मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है। वहीं एक अन्य किसान की हालत गंभीर है, जिसका रोहतक के PGI में इलाज जारी है।

नहीं सबसे कम उम्र का किसान भी
बता दें कि रविवार के दिन हुई इन चार किसानों की मौत में  बठिंडा का रहने वाला सबसे कम उम्र का किसान 18 साल के जश्नप्रीत सिंह भी शामिल है। जिसकी शनिवार देर रात अचानक तबीयत खराब हो गई थी। जिसके बाद उसे सिविल अस्पताल और फिर PGI ले जाया गया। जहां सुबह उसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया

ट्राली में मिली किसान की बॉडी
वहीं हरियाणा के जींद का रहने वाला जगबीर का शव रविवार सुबह ट्राली में मिला। वह टीकरी बॉर्डर पर पिछले एक महीने से धरना दे रहा था। जिनकी उम्र  66 साल थी। बताया जा रहा है कि जगबीर की मौत हार्ट अटैक की वजह से हुई हो होगी।

टेंट में सोए दो किसान सुबह मिली दोनों की डेड बॉडी
हरियाणा सोनीपत के रहने वाले किसान  बलवीर सिंह और पंजाब के लिदवां निवासी निर्भय सिंह शनिवार रात टेंट में साथ सुकून की नींद सोए थे। लेकिन सुबह जब उनके साथियों ने उन्हें जगाने की कोशिश तो वह नहीं जागे, डॉक्टरों के पास ले जाने के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। पता लगाया जा रहा है कि उनकी मौत के पीछे की क्या वजह थी।

देश 54 अन्नदाता छोड़ चुके हैं दुनिया
बता दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहे देश के लाखों करोड़ों अन्नदताओं की लड़ाई जारी है। 39 दिन के संघर्ष में करीब  54 किसानों की मौत हो चुकी है। जिसमें से किसी ने आत्महत्या कर ली तो किसी जान बीमारी या कड़कड़ाती ठंड और हार्ट अटैक से गई। लेकिन इसके बाद भी वह अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वह कह  चुके हैं जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं पूरी करती वह पीछे नहीं हटेंगे। चाहे सभी किसानों की मौत ही क्यों ना हो जाए।

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