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Punjab Election 2022: सियासी दलों को मुश्किलों में डाल सकता है किसान संघ, न काहू से दोस्ती, न बैर..समझिए प्लान

संगठन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि संगठन की नीति चुनाव का बहिष्कार करने की नहीं बल्कि तटस्थ रहने की है। जिसके अनुसार नेता न तो उम्मीदवार के रूप में खड़ा हो सकता है और न ही किसी उम्मीदवार का समर्थन कर सकता है।

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Chandigarh, First Published Jan 13, 2022, 12:02 PM IST
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चंडीगढ़ : पंजाब में एक ओर किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल (Balbir Singh Rajewal) और गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Charuni) चुनाव लड़ने जा रहे हैं। सीट बंटवारे पर एक-दूसरे के खिलाफ डटने की धमकी दे रहे हैं। इधर दूसरी ओर इस सब के बीच भारतीय किसान संघ (उगराह गुट) ने निर्णय लिया कि पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Election 2022) में वह न तो किसी का समर्थन करेंगे और न ही विरोध।

अपने हक की आवाज उठाएगा संघ
जोगिंदर सिंह उगराहन की अध्यक्षता में भारतीय किसान संघ की राज्य समिति की बैठक में तय किया गया कि चुनाव के दौरान वे मतदाताओं के बीच जाएंगे और उनको, उनके हक के लिए जागरुक करेंगे। उनके सामने तीन कृषि कानूनों के विरोध में चलाए गए देशव्यापी आंदोलन का उदाहरण भी रखा जाएगा। संगठन के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने कहा कि संगठन की नीति चुनाव का बहिष्कार करने की नहीं बल्कि तटस्थ रहने की है। जिसके अनुसार नेता न तो उम्मीदवार के रूप में खड़ा हो सकता है और न ही किसी उम्मीदवार का समर्थन कर सकता है।

नेतृत्व को मजबूत करने का प्लान 
सुखदेव सिंह कोकरी कलां ने बताया  कि संगठन के प्रत्येक सदस्य को यह तय करने का अधिकार है कि वह अपनी पसंद के किसी भी उम्मीदवार को वोट दें या नहीं। क्योंकि चुनाव लड़ने वाले सभी वोटिंग दल किसानों सहित सभी मेहनतकशों की एकता को तोड़ रहे हैं। हालांकि, उनके ज्वलंत और मूलभूत मुद्दों को एकता और संघर्ष से ही हल किया जाता है। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी को संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय बैठक के तुरंत बाद संगठन के तत्वावधान में सभी जिलों में शिक्षा अभियान की श्रृंखला शुरू की जाएगी। शिक्षा अभियान की तैयारी के लिए सभी स्तरों पर नेतृत्व को मजबूत किया जाएगा। 

हर वर्ग की उठाएंगे आवाज
उगराह गुट ने बताया कि किसानों और खेत मजदूरों को कर्ज और आत्महत्या से बचाने के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे भूमि सुधारों को लागू करके भूमि सुधार, सूदखोरी और बेरोजगारी को खत्म करना, निजीकरण, व्यावसायीकरण और वैश्वीकरण की साम्राज्यवादी नीतियों के कारण मुद्रास्फीति, ड्रग्स जैसे मुद्दे और उनके समाधान के लिए संघर्ष की तैयारी इस अभियान का लक्ष्य होगा।

किसान-मजदूर पर मजबूत पकड़
गुरुवाल को हुई संघ की बैठक में झंडा सिंह जेठूके, शिंगारा सिंह मान, जनक सिंह भुटाल, जगतार सिंह कालाझार, हरिंदर कौर बिंदु, परमजीत कौर पिथो और कमलजीत कौर बरनाला के अलावा 16 जिलों के प्रधान सचिव मौजूद थे। बता दें कि उगराह गुट की किसानों और मजदूरों पर मजबूत पकड़ है। गुट ने जो निर्णय लिया है, यह किसी ने किसी स्तर पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे राजेवाल और गुरनाम सिंह चढूनी के लिए झटका भी साबित हो सकता है। वैसे भी यह गुट तीन कृषि कानूनों में भी अपनी अलग पहचान करने में कामयाब रहा है।

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