पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly  Election) को लेकर जन की बात, इंडिया न्यूज ने 21 नवम्बर से 20 दिसंबर 2021 तक लोगों से रायशुमारी की है। ओपिनियन पोल (opinion poll) में करीब दस हजार लोगों ने भाग लिया।

नई दिल्ली। पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) को लेकर जन की बात, इंडिया न्यूज ने 21 नवम्बर से 20 दिसंबर 2021 तक लोगों से रायशुमारी की है। ओपिनियन पोल (opinion poll) में करीब दस हजार लोगों ने भाग लिया। इस ओपिनियन पोल में 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में 50 से 57 सीटों पर आम आदमी पार्टी (Aam Admi Party) जीत रही है। जबकि सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी (Congress) 40 से 46 सीट जीतकर राज्य में दूसरी बड़ी पार्टी बनती दिख रही है। किसान बिल को लेकर एनडीए (NDA) से अलग हुए शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) को 16 से 21 सीटें मिल रही हैं तो भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) शून्य से चार सीटें जीतती दिख रही है। 

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किस क्षेत्र में किसको कितनी सीटें?

मालवा: इस क्षेत्र में आम आदमी पार्टी को 31 सीटें मिल रही हैं। जबकि कांग्रेस को 20-26 सीटें मिल रही हैं। शिरोमणि अकाली दल को मालवा में 8-11 सीटें मिल रही हैं। वहीं बीजेपी को दो सीटें मिलने की उम्मीद है।

माझा: इस क्षेत्र में कांग्रेस और आप में कांटे की टक्कर है। आम आदमी पार्टी को 11-13 सीटें मिल रही हैं। कांग्रेस को करीब 11 सीटें मिल रहीं। शिरोमणि अकाली दल को 5-6 सीटें मिल रही हैं। जबकि बीजेपी को एक सीट से ही संतोष करना पड़ सकता है।

दोआबा: दोआबा में भी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में सीधी टक्कर है। आम आदमी पार्टी को दोआबा में 8-10 सीटें मिल रही हैं। जबकि कांग्रेस को नौ सीटें मिल रही हैं। अकाली दल यहां तीन से चार सीटें पा रहा है। जबकि बीजेपी को सिर्फ एक सीट पर ही जीतती दिख रही।

ओपीनियन पोल में ये लोग रहे शामिल

सर्वे का सैंपल साइज दस हजार लोगों का रहा है। इस सर्वे में 18 से 25 साल के आयुवर्ग के करीब दस प्रतिशत लोग शामिल रहे। जबकि 25 से 35 वर्ष के करीब तीस प्रतिशत सर्वे में शामिल रहे। 35 से 45 वर्ष के करीब 45 प्रतिशत लोग शामिल रहे। पंद्रह प्रतिशत लोग 45 प्लस आयुवर्ग वाले थे। 

वोट शेयर में भी आप आगे

सर्वे में आम आदमी पार्टी को करीब 37.80 प्रतिशत वोट मिलने के आसार हैं तो कांग्रेस को 34.70 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। शिरोमणि अकाली दल के हिस्से में 20.5 प्रतिशत वोट शेयर है। वहीं बीजेपी को पांच प्रतिशत तो अन्य को दो प्रतिशत वोट मिलेंगे।

55 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वर्तमान सरकार औसत 

पंजाब में कांग्रेस सरकार को औसत रैंकिंग देने वालों की संख्या करीब 55 प्रतिशत है। जबकि 25 प्रतिशत लोगों का मानना है कि कांग्रेस सरकार अच्छा काम कर रही है। जबकि 20 प्रतिशत लोग मानते हैं कि बहुत खराब शासन रहा है। 

सबसे अधिक प्रभावी है कृषि कानून का मुद्दा

पंजाब में कृषि कानूनों के मुद्दे का सबसे अधिक असर चुनाव पर पड़ने जा रहा है। करीब 70 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यह मुद्दा असर डालेगा। जबकि 20 प्रतिशत का मानना है कि चुनाव में कृषि कानूनों के मुद्दे का कोई असर नहीं होगा। दस प्रतिशत कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। 

पंजाब चुनाव के मुख्य मुद्दे क्या हैं?

महंगाई: कृषि कानूनों के अलावा पंजाब के 20 प्रतिशत लोगों का मानना है कि महंगाई इस राज्य में सबसे बड़ा मुद्दा होगा। 

विकास: राज्य के 18 प्रतिशत लोगों का मानना है कि विकास इस राज्य में मुख्य मुद्दों में शामिल है। 

बेरोजगारी: 20 प्रतिशत लोग बेरोजगारी को चुनाव का मुख्य मुद्दा मानते हैं। 

ड्रग्स: प्रदेश के दस प्रतिशत लोगों के अनुसार ड्रग्स चुनाव में मुख्य मुद्दा होगा। 

शिक्षा: 15 प्रतिशत लोगों ने माना कि शिक्षा यहां मुख्य मुद्दा होगा।

अस्पताल: दस प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं जो अस्पताल को चुनाव को मुख्य मुद्दा मानते हैं। 

अन्य: सात प्रतिशत लोगों के अनुसार पंजाब चुनाव में अन्य कई मुद्दे प्रभावी होंगे।

किस जाति का वोट किस पार्टी को?

ओबीसी

ओबीसी (OBC) जातियों का सबसे अधिक वोट शेयर करीब 35 प्रतिशत आम आदमी पार्टी के हिस्से में आ रहा है। जबकि कांग्रेस उससे महज पांच फीसदी कम है। कांग्रेस को ओबीसी का 30 प्रतिशत मिल रहा है। ओबीसी जाति में 20 प्रतिशत वोट का सेंध बीजेपी लगा रही है जबकि शिरोमणि अकाली दल महज 15 प्रतिशत ही बटोर पा रहा है

जाट सिख

जाट सिख (Jat Sikh) जाति का सबसे अधिक 45 प्रतिशत आम आदमी पार्टी बटोर रही है। जबकि कांग्रेस महज 25 प्रतिशत ही बटोरने में कामयाब होती दिख रही है। अकाली दल के हिस्से में बीस प्रतिशत वोट शेयर तो बीजेपी गठबंधन को दस प्रतिशत जाट सिख वोटर्स का समर्थन मिल रहा है। 

एससी

एससी (SC) वोटर्स में भी आम आदमी पार्टी 40 प्रतिशत वोट शेयर कर रही है। जबकि कांग्रेस सबसे अधिक करीब 48 प्रतिशत बटोरने में कामयाब होती दिख रही है। अकाली दल के हिस्से में एससी वोट का आठ प्रतिशत तो बीजेपी गठबंधन को चार प्रतिशत ही मिल रहा है।